Home » अन्य » वायरल खबरें » बिना OTP फ्रॉड, करोड़ों की ड्रग्स बरामदगी के साथ ही नगर निगम में गूंजा पानी का संकट | Top 5 Ghaziabad News
Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद में अपराध और जालसाजी का एक ऐसा दौर सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। एक तरफ जहाँ इंटरनेशनल साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट और बिना ओटीपी भेजे लाखों-करोड़ों रुपये उड़ाकर तकनीकी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं,
वहीं दूसरी तरफ पॉश सोसायटियों से करोड़ों का ड्रग्स सिंडिकेट और नाती को पाने के लिए 75 साल के बुजुर्गों का फर्जी डेथ-बर्थ सर्टिफिकेट का खेल समाज को चौंका रहा है। इस बीच, बुनियादी सुविधाओं के लिए तड़पती जनता का दर्द भी सीधे अधिकारियों की चौखट तक गूंज उठा है। तो चलिए इस लेख के जरिए इन 5 बड़ी और सनसनीखेज खबरों को विस्तार से जानते हैं।
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अगर आपके फोन की स्क्रीन अचानक ब्लैक (काली) हो जाए, तो तुरंत सावधान हो जाएं! क्योंकि यह साइबर ठगों का नया जाल हो सकता है। अब ठग एडवांस लेवल की चोरी कर रहे हैं, जहां बिना ओटीपी आए भी खाता साफ हो जाता है। ऐसी ही दो घटनाएं गाजियाबाद से सामने आई हैं, तो चलिए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद के इंदिरापुरम और साहिबाबाद थाना क्षेत्र में ठगों ने बिना कोई ओटीपी या मैसेज भेजे दो लोगों के खातों से 1.05 लाख रुपये उड़ा लिए हैं। इस मामले में ट्रांस हिंडन के प्रभारी डीसीपी धवल जायसवाल के निर्देश पर साइबर सेल की मदद से रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पहला मामला वसुंधरा सेक्टर-13 का है, जहां राकेश शर्मा के बेटे राहुल शर्मा के बैंक खाते से 95,000 रुपये गायब हो गए। पीड़ित के पास न तो कोई ओटीपी आया और न ही बैंक से पैसे कटने का कोई अलर्ट मैसेज मिला। बैंक में पासबुक एंट्री कराने के बाद उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चला।
वहीं दूसरा मामला शहीदनगर का है, जहां अरमान का साइबर ठगों ने मोबाइल फोन हैक कर लिया था। ठगी के दौरान कुछ देर के लिए पीड़ित की स्क्रीन पूरी तरह से काली (Black) हो गई थी। जब फोन सामान्य हुआ, तब खाते से 10,000 रुपये कटने की जानकारी मिली।
पुलिस ने दोनों मामलों में शिकायत दर्ज कर ली है। साइबर सेल की तकनीकी टीम उन बैंक खातों की डिटेल्स खंगाल रही है, जिनमें यह रकम ट्रांसफर की गई है।
आजकल साइबर अपराधी पारंपरिक तरीकों को छोड़कर ‘नेक्स्ट-जेन’ तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें बिना ओटीपी के भी खाते साफ किए जा सकते हैं। ठग फोन को हैक कर बैंक से आने वाले अलर्ट मैसेज और ओटीपी नोटिफिकेशन्स को बैकएंड में ही डिलीट या ब्लॉक कर देते हैं, जिससे यूजर को भनक तक नहीं लगती।
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन से कल गिरफ्तार हुए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स तस्कर नितिन यादव को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने आरोपी को दबोचने के बाद जब इंदिरापुरम स्थित उसके दूसरे ठिकाने पर छापा मारा, तो वहां से करोड़ों रुपये का मादक पदार्थों का जखीरा बरामद हुआ। राजनगर में गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का पूरा एक्शन इंदिरापुरम के इस सीक्रेट गोदाम पर केंद्रित हो गया है, तो चलिए जानते हैं क्या मिला इस छापेमारी में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मूल रूप से इटावा के थाना बसरेहर का रहने वाला नितिन यादव गाजियाबाद में रहकर बड़े पैमाने पर ऑन-डिमांड ड्रग्स का सिंडिकेट चला रहा था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नंदग्राम थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने पुलिस से बचने के लिए दो अलग-अलग जगह फ्लैट किराए पर ले रखे थे। वह खुद राजनगर एक्सटेंशन की पाम रिसोर्ट सोसाइटी में आलीशान तरीके से रहता था, जबकि इंदिरापुरम के शक्ति खंड वाले फ्लैट को उसने पूरी तरह से ड्रग्स के गोदाम और पैकिंग यूनिट के रूप में तब्दील कर रखा था।
छापेमारी के दौरान एएनटीएफ (ANTF) की मेरठ ऑपरेशनल यूनिट को इंदिरापुरम वाले ठिकाने से भारी मात्रा में सिंथेटिक और पारंपरिक ड्रग्स मिली, जिसमें एमडीएमए (MDMA), चरस, ओड़िशा का गांजा और मैंगो गांजा शामिल है। इसके अलावा पुलिस ने मौके से 5 लाख रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, 10 बैंक कार्ड, इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे और पैकिंग मशीनें भी बरामद की हैं।
जांच में यह सामने आया है कि आरोपी का नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह सिंडिकेट बड़े पैमाने पर अवैध पदार्थों के भंडारण और वितरण का काम कर रहा था। वर्तमान में पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों और उनके संपर्कों की पहचान करने के लिए विस्तृत जांच कर रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके।
गाजियाबाद के मोदीनगर में 6 साल के मासूम की कस्टडी को लेकर नाना-नानी द्वारा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। कैंसर से बेटी की मौत के बाद, 75 वर्षीय बुजुर्ग दंपति ने नाती को पूरी तरह अपने पास रखने के लिए नगर निगम से एक ऐसा बर्थ सर्टिफिकेट जारी करवा लिया, जिसमें वे खुद बच्चे के असली माता-पिता बन बैठे हैं। पीड़ित पिता ने अब नगर आयुक्त से इस धोखाधड़ी की शिकायत की है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, मोदीनगर निवासी हीरा कारोबारी राजीव कुमार शर्मा की शादी साल 2015 में गोविंदपुरम की रश्मि शर्मा से हुई थी। संतान न होने पर इस दंपति ने 16 मई 2020 को हापुड़ के एक अस्पताल से कानूनी और पारिवारिक सहमति से एक दिन के नवजात शिशु को गोद लिया था। सरकारी रिकॉर्ड और टीकाकरण के कागजात में भी राजीव और रश्मि का नाम ही माता-पिता के तौर पर दर्ज था।
26 फरवरी 2023 को राजीव की पत्नी रश्मि शर्मा की कैंसर के कारण मृत्यु हो गई। इसके बाद से ही बच्चे के नाना मेघराज शर्मा (स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड) और नानी पुष्पलता शर्मा (शिक्षा विभाग से रिटायर्ड) ने नाती पर अपना हक जताना शुरू कर दिया। बच्चे को पूरी तरह अपने पास रखने के लिए 75 वर्षीय बुजुर्ग दंपति ने गाजियाबाद नगर निगम के कवि नगर जोन से बच्चे का एक नया जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) जारी करवा लिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सरकारी प्रमाण पत्र में नाना मेघराज को ‘पिता’ और नानी पुष्पलता को ‘माता’ दर्शाया गया है। इस सर्टिफिकेट पर पंजीकरण (Registration) की तारीख और सर्टिफिकेट जारी होने की तारीख दोनों 10 जुलाई 2023 दर्ज है, जिससे नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों ने यह सोचना भी जरूरी नहीं समझा कि 75 साल का बुजुर्ग जोड़ा किसी बच्चे के जैविक माता-पिता कैसे हो सकता है!
गाजियाबाद में बुनियादी सुविधाओं और पानी की किल्लत से बेहाल जनता का दर्द अब सीधे अधिकारियों के दफ्तरों तक गूंजने लगा है। नगर निगम की जनसुनवाई में पहुंचे सुदामापुरी के एक फरियादी ने जब कहा कि ‘साहब दो दिन से नहाया नहीं हूं’, तो नगर निगम महकमे में हड़कंप मच गया। नगर आयुक्त ने इस पर तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए जलकल विभाग की टीम को ग्राउंड पर उतारा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद नगर निगम में मंगलवार को आयोजित ‘संभव’ जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान सुदामापुरी इलाके का एक निवासी अपनी फरियाद लेकर सीधे नगर आयुक्त के सामने पहुंचा। फरियादी ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा, “साहब, दो दिन से नहाया नहीं हूं। पानी की एक बूंद तक नहीं आ रही है।” इस बात को सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग और अधिकारी अवाक रह गए।
शिकायत की गंभीरता और फरियादी की लाचारी को देखते हुए गाजियाबाद के नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया। नगर आयुक्त ने जलकल विभाग के संबंधित अधिकारियों को बिना किसी देरी के तत्काल सुदामापुरी के लिए रवाना किया। अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए गए कि वे मौके पर जाकर समस्या की जांच करें और सुदामापुरी इलाके की जलापूर्ति (Water Supply) को तुरंत बहाल कराएं।
नगर निगम की इस साप्ताहिक जनसुनवाई में जनहित और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का अंबार देखने को मिला। इस दौरान विभिन्न विभागों से जुड़ी कुल 29 शिकायतें दर्ज की गईं। पानी की किल्लत के अलावा साफ-सफाई, जलभराव और स्ट्रीट लाइट जैसी अन्य नागरिक समस्याएं भी प्रमुखता से उठाई गईं।
गाजियाबाद के वैशाली इलाके में रिटायर्ड बैंक मैनेजर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.19 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के एक शातिर सदस्य को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी शुभम सिंह यादव लखनऊ का रहने वाला है और एमबीए पास है। पुलिस जांच में इस गिरोह के तार सीधे सिंगापुर और कंबोडिया से जुड़े मिले हैं, जो भारत में बैठे अपने गुर्गों के जरिए इस खेल को अंजाम दे रहे थे।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद के वैशाली में 84 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर को 12 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 2.19 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के एक MBA पास सदस्य को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कंबोडिया और सिंगापुर से संचालित इस गिरोह ने फर्जी सीबीआई और अदालती सेटअप का उपयोग करके पीड़ित को डराकर यह रकम ऐंठी, जिसमें से 19 लाख रुपये फ्रीज कर लिए गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल डिजिटल धोखाधड़ी के मामले में पुलिस गहन जांच कर रही है।
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