देश में इस बार मानसून की धीमी शुरुआत ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. जून महीने में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज होने और जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश की संभावना के बीच केंद्र सरकार ने संभावित सूखे से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर कई मंत्रालयों और राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए.
बैठक में कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. सरकार का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि कमजोर मानसून का असर खेती, पेयजल, बिजली और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर कम से कम पड़े.
इस साल जून में देशभर में केवल लगभग 99.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम रही. मौसम के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1901 के बाद ये जून के सबसे कम बारिश वाले महीनों में से एक रहा. सबसे ज्यादा असर मध्य भारत के कई हिस्सों में देखा गया, जहां बारिश का घाटा 50 प्रतिशत से भी ज्यादा दर्ज किया गया. कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई, जलाशयों के जलस्तर और ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है. यही वजह है कि सरकार पहले से ही एहतियाती कदम उठा रही है.
समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारों को उन क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए जहां बारिश कम होने की संभावना है. ऐसे इलाकों में किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलें अपनाने की सलाह देने पर जोर दिया गया. सरकार ने मोटे अनाज, दालें और चारे जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की जरूरत भी बताई है. इससे पानी की बचत होगी और किसानों को संभावित नुकसान से राहत मिल सकती है.
कम बारिश की स्थिति में जल संकट गहराने की आशंका रहती है. इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग को देशभर के प्रमुख बांधों और जलाशयों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही ऊर्जा मंत्रालय को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अगर सूखे जैसी स्थिति बनती है तो बिजली आपूर्ति बाधित न हो. सरकार का कहना है कि फिलहाल आवश्यक खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी नियंत्रण में हैं.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति बनी हुई है, जो भारत में मानसून को कमजोर करने के लिए जानी जाती है. दूसरी ओर, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) फिलहाल तटस्थ अवस्था में है, इसलिए उससे मानसून को अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना कम मानी जा रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जुलाई में भी बारिश सामान्य से कम रहती है तो खेती, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और समय पर उठाए गए कदम आने वाले महीनों में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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