Shahjahnpur News: जलालाबाद। कसारी गांव में करंट लगने से अमर सिंह और उनकी पत्नी सुषमा की मौत ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। एक ही रात में पांच मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। अब परिवार के सामने बच्चों की परवरिश, पढ़ाई और भविष्य की सबसे बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। गांव में हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इन बच्चों की जिम्मेदारी अब कौन उठाएगा। अमर सिंह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। वह पत्नी और बच्चों के साथ दूसरे जिले में स्थित ईंट भट्ठे पर काम करते थे। करीब 15 दिन पहले ही बारिश का मौसम शुरू होने पर पूरा परिवार गांव लौटा था।
किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद एक हादसा पूरे परिवार को बिखेर देगा। मृतक के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी ही थी। गांव में अमर सिंह के नाम करीब दो-तीन बीघा जमीन है, लेकिन वह भी नदी के पानी से प्रभावित रहने के कारण खेती के लिहाज से ज्यादा उपयोगी नहीं है। ऐसे में परिवार के पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं बचा है।हादसे के बाद घर के बाहर बैठी अमर सिंह की करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग मां का विलाप हर किसी की आंखें नम कर रहा था। वह बार-बार यही कह रही थीं कि मौत हमें आनी थी, मेरे बेटे-बहू को क्यों उठा लिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग भी भावुक हो उठे। गांव में पूरे दिन शोक का माहौल रहा। ग्रामीण बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को परिवार की आर्थिक सहायता के साथ बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण की व्यवस्था भी करनी चाहिए। राजस्व निरीक्षक जितिन अवस्थी ने बताया कि घटना की जानकारी प्रशासन को दे दी गई है। शासन की जो भी सहायता पात्रता के अनुसार होगी, वह पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी।
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