लखनऊ के हजरतगंज स्थित उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में रविवार को साहित्य और संस्कृति का संगम हुआ। सर्वजन हिताय साहित्यिक समिति ने वार्षिक सारस्वत सम्मान समारोह का आयोजन किया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।
समारोह का मुख्य आकर्षण विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सात साहित्यकारों को सारस्वत सम्मान से सम्मानित करना रहा। इस दौरान साहित्य, समाज और संस्कृति के परस्पर संबंधों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
साहित्यकार समाज का पथप्रदर्शक होता है
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि साहित्यकार समाज का पथप्रदर्शक होता है। उनकी रचनाएं समाज को सही दिशा देने और मानवीय मूल्यों को स्थापित करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने साहित्य की भूमिका को समाज के निर्माण और संस्कारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण बताया।
सर्वजन हिताय साहित्यिक समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय ने समिति की गतिविधियों और साहित्यिक सरोकारों पर प्रकाश डाला। समिति के सचिव अनन्त प्रकाश तिवारी और डॉ. हरिशंकर मिश्र ने भी साहित्य के सामाजिक दायित्वों पर अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिवओम अंबर ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। उनकी काव्य प्रस्तुति को श्रोताओं ने सराहा।
इन विभूतियों को सम्मानित किया गया
इस अवसर पर डॉ. जीवन शुक्ल (कन्नौज), डॉ. दयाराम मौर्य (प्रतापगढ़), अंजनी कुमार सिंह (रायबरेली), डॉ. मधु प्रधान (कानपुर), महेंद्र भीष्म (लखनऊ), धीरज मिश्र (रायबरेली) और सुनील कुमार वाजपेयी (लखनऊ) को सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मानित साहित्यकारों ने इसे अपने साहित्यिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया और समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।
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