पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने सोमवार को कहा कि वह सिंधु जल संधि के तहत देश को मिलने वाले पानी की ‘वैध हिस्सेदारी’ को सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। भारत ने पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए थे। इनमें सबसे प्रमुख कदम 1960 की सिंधु जल संधि को ‘स्थगित’ करना था, जिसके तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल के बंटवारे और उपयोग का प्रावधान था।
पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में ‘यह संकल्प लिया गया कि सरकार के निर्देशों और पाकिस्तान की जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप देश के हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।’
बैठक में 24 अप्रैल 2025 को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक के निर्देशों की भी पुष्टि की गई। उस बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने या उसका मार्ग परिवर्तित करने की किसी भी कार्रवाई को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा। कोर कमांडर्स ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करते हुए पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं की संचालन क्षमता, पेशेवर दक्षता और युद्धक तैयारी पर संतोष व्यक्त किया।
बैठक में यह भी कहा गया कि ‘अफगान तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों द्वारा पाकिस्तान में हमले करने के लिए किया जा रहा है, जिस पर गंभीर चिंता जताई गई।’
2 जुलाई को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा हम ‘सिंधु जल संधि को स्थगित करने और पाकिस्तान के हिस्से के वैध प्रवाह में बाधा डालने के बहाने के तौर पर आतंकवाद के बेबुनियाद आरोपों का सहारा लेने की भारत की कोशिश’ को अस्वीकार करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘यह बात स्पष्ट होनी चाहिए, वास्तविक मुद्दा आतंकवाद नहीं है बल्कि मुद्दा भारतीय नेतृत्व में मजबूत होती वह सोच है, जिसके तहत वे साझा अंतरराष्ट्रीय नदी प्रणाली को एक ऐसी सामरिक परिसंपत्ति मानते हैं, जिसे अपनी मर्जी से नियंत्रित किया जा सकता है, रोका जा सकता है या उसका रुख मोड़ा जा सकता है।’
भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को ही कहा है कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख अडिग है और यह संधि फिलहाल स्थगित है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को निरंतर समर्थन दिए जाने के जवाब में यह कदम उठाया गया है।
मंगलवार को इस्लामाबाद में आयोजित संगोष्ठी में, उप प्रधानमंत्री इसहाक डार ने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को रद्द करने के भारत के फैसले को खारिज करता है और यह संधि ‘वैध, बाध्यकारी और प्रभावी’ बनी हुई है। उन्होंने कहा था, ‘कोई भी पक्ष एकतरफा रूप से ऐसी संधि के तहत अपने दायित्वों को निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता है, जिसमें ऐसा कोई प्रावधान ही न हो।’
विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई यह संधि 1960 से ही भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है।
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