सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ DMK की याचिका खारिज कर दी और पार्टी को कड़ी फटकार लगाई। …और पढ़ें
सीएम विजय के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज।
सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका को खारिज कर कड़ी फटकार लगाई।
सीएम विजय के करूर भगदड़ पीड़ितों से मिलने पर सवाल उठाए गए।
कोर्ट ने कार्यपालिका के प्रमुख के दौरे पर पाबंदी से इनकार किया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ दायर याचिका पर अहम टिप्पणी करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को कड़ी फटकार लगाई। इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायलय ने DMK की उस याचिका को खारिज भी कर दिया, जिसमें सीएम विजय के करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों से मिलने के कार्यक्रम पर सवाल उठाए गए थे।
इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा इस मामले के गवाहों को प्रभावित करने के DMK के आरोपों पर सुनवाई करने से भी पूरी तरह से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने पूछा- सीएम के दौरे पर पाबंदी कैसे लगा सकते हैं?
याचिका पर सवाल खड़े करते हुए न्यायाधीश जस्टिस केवी विश्वनाथन और न्यायाधीष आलोक अराधे की बेंच ने DMK के वरिष्ठ वकील रंजित कुमार से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका भला कार्यपालिका के प्रमुख मुख्यमंत्री के दौरों को कैसे तय या नियंत्रित कर सकती है? इसके साथ ही बेंच ने हैरान होते हुए पूछा कि किसी हादसे के पीड़ितों और उनके परिवारों से मिलना गवाहों को प्रभावित करना कैसे हो गया?
इसके साथ ही न्यायाधीशों ने सख्त रुख दिखाते हुए DMK के वकील से कहा कि या तो वे खुद इस याचिका को वापस ले लें और कानून के तहत किसी अन्य विकल्प का इस्तेमाल करें, नहीं तो कोर्ट इस याचिका को खारिज कर देगा। इसके बाद वकील रंजित कुमार याचिका वापस लेने पर सहमत हो गए और सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस ली गई याचिका मानकर खारिज कर दिया।
बता दें कि DMK सचिव आरएस भारती ने कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, राज्य के मंत्री आधव अर्जुना और मामले के अन्य आरोपियों को इस केस पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए।
उनकी मांग थी कि सीबीआई (CBI) जांच पूरी होने तक पीड़ितों के परिवारों के साथ उनकी बातचीत पर नजर रखी जाए या उसे नियंत्रित किया जाए। इसके अलावा याचिका में उन खबरों का हवाला दिया गया था कि मुख्यमंत्री 10 जुलाई को करूर का दौरा करने वाले हैं, जहां वे मृतकों के परिवारों और घायलों को सरकारी आदेश, अनुकंपा नियुक्तियां और अन्य सहायता लाभ बांटेंगे।
गौरतलब है कि पिछले साल 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने करूर में हुई इस भयानक भगदड़ की जांच देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंपी थी। इस दर्दनाक हादसे में 41 लोगों की जान चली गई थी। तब देश की शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस घटना ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होना बेहद जरूरी है।