कमजोर मानसून से जीडीपी वृद्धि दर में दबाव संभव – Hindustan

नई दिल्ली, एजेंसी। कमजोर मानसून से वित्त वर्ष 2027 में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 0.6% से 1.2% तक कम हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बारिश उम्मीद से कम हुई तो सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। हालांकि, खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर बहुत बड़ा असर पड़ने की आशंका कम है। इसकी वजह बेहतर सिंचाई व्यवस्था, सरकार के पास पर्याप्त अनाज का भंडार और समय रहते उठाए जाने वाले सरकारी कदम हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जून में देशभर में सामान्य से करीब 40% कम बारिश हुई। यह 1901 के बाद पांचवां सबसे सूखा जून रहा। सबसे अधिक असर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत पर पड़ा। मध्य भारत में भी यह सातवां सबसे सूखा जून रहा। कम बारिश से जून में बुवाई भी प्रभावित हुई। धान, दालों और तिलहन की बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब 23% कम रही。

कमजोर मानसून का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। देश की कुल अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी करीब 18 फीसदी है। जिन वर्षों में बारिश सामान्य रही, उनमें कृषि क्षेत्र की औसत वृद्धि 6.7% रही। वहीं, सामान्य से कम बारिश वाले वर्षों में यह घटकर 3.2% रह गई, जबकि बेहद कमजोर मानसून वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र की वृद्धि 0.2% तक सिमट गई। खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर बहुत बड़ा असर पड़ने की आशंका कम है। हालांकि दूध, फल, दाल और मसालों जैसी कुछ चीजों की कीमतों में तेजी आ सकती है। ये सभी मिलकर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का करीब 14% हिस्सा बनाती हैं। कमजोर मानसून का सबसे सीधा असर ट्रैक्टर कंपनियों की बिक्री पर देखने को मिल सकता है।

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