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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को शुक्रवार तड़के उनके गृहनगर मशहद में शिया समुदाय के सबसे पवित्र स्थल इमाम रज़ा दरगाह में दफना दिया गया. खामेनेई की इसी साल 28 फरवरी को मध्य तेहरान में अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है. (Photo AP)
मौत के करीब चार महीने बाद कड़े सुरक्षा पहरे और भारी तनाव के बीच उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई है. 6 दिनों तक चली शवयात्रा और श्रद्धांजलि सभाओं के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को मशहद लाया गया. (Photo-AP)
मशहद के गवर्नर हसन हुसैनी के मुताबिक, अंतिम संस्कार में लगभग 1.5 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हुए. मशहद में पड़ रही 35 डिग्री सेल्सियस की झुलसाने वाली गर्मी के बीच उमड़ी भीड़ को ठंडा रखने के लिए प्रशासन को वॉटर स्प्रिंकलर्स (पानी छिड़कने वाली मशीनों) का सहारा लेना पड़ा. (Photo-AP)
खामेनेई की अंतिम विदाई की नमाज 101 वर्षीय रूढ़िवादी नेता अयातुल्ला हुसैन नूरी हमेदानी ने पढ़ाई. 28 फरवरी को हुए इस भीषण हवाई हमले में केवल खामेनेई ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए थे. (Photo-AP)
खामेनेई के साथ ही उनकी नन्हीं पोती, दामाद, बेटी और उनके बेटे मुजतबा खामेनेई की पत्नी ज़हरा हद्दाद अदेल को भी एक साथ इसी पवित्र परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया है. (Photo-AP)
खामेनेई ईरान के इतिहास में दूसरे ऐसे शासक हैं जिन्हें मशहद शहर में दफनाया गया है. इससे पहले साल 1747 में नादिर शाह की हत्या के बाद उन्हें यहां दफनाया गया था. (Photo-AP)
इस पूरे आयोजन के दौरान सभी की नजरें खामेनेई के बेटे और ईरान के नए घोषित सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई पर टिकी थीं, लेकिन वे पूरे 6 दिनों के कार्यक्रम से पूरी तरह गायब रहे. सूत्रों के मुताबिक, मुजतबा भी उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता की मौत हुई थी. (Photo-AP)
सुरक्षा कारणों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की सलाह पर वे जनता के सामने नहीं आ रहे हैं और केवल लिखित बयानों के जरिए ही संवाद कर रहे हैं. युद्ध के चलते खामेनेई का अंतिम संस्कार मार्च से टालकर जुलाई में तय किया गया था. (Photo-AP)
इसकी शुरुआत पिछले शनिवार को तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला से हुई, जहां हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों के डेलिगेशन पहुंचे. सोमवार को तेहरान की सड़कों पर 12 मिलियन (1.2 करोड़) से ज्यादा लोग जुटे और जनाजे को 10 किलोमीटर दूर आज़ादी स्क्वायर ले जाया गया. (Photo-AP)
इसके बाद ताबूत को इराक के पवित्र शिया शहरों (नजफ और करबला) में घुमाया गया, जहां लोगों ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ‘बदला लेने’ के हिंसक नारे लगाए. (Photo-AP)
खामेनेई के 37 वर्ष लंबे शासन के अंत के साथ ईरान एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुका है वहीं दूसरी तरफ अभी भी अमेरिका और इजरायल के साथ तनावपूर्ण हालात का सामना कर रहा है. (Photo-AP)
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