Explainer: ब्रह्मपुत्र पर चीन का डैम भारत के लिए कितना बड़ा खतरा? पानी और सुरक्षा पर समझिए पूरा खेल – India.Com

China Brahmaputra Dam: तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाने की तैयारी कर रहा है. इसे लेकर भारत में पानी की सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण और क्षेत्रीय रणनीति को लेकर चिंता बढ़ गई है. आपको बता दें ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra River) एक नदी नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की जीवनरेखा है. ऐसे में अगर नदी के प्राकृतिक बहाव में बदलाव होता है, तो इसका असर लाखों लोगों के जीवन के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत एडवांस सैटेलाइट, रिमोट सेंसिंग, GPS और GIS जैसी तकनीकों की मदद से डैम और नदी की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रख सकता है. इससे भारत को चीन की ओर से मिलने वाले सीमित या देर से साझा किए जाने वाले हाइड्रोलॉजिकल डेटा पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वैज्ञानिक मानते हैं कि स्वतंत्र निगरानी प्रणाली भविष्य में आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी जारी करने के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है.

ब्रह्मपुत्र नदी पूर्वोत्तर भारत के करोड़ों लोगों के लिए पीने के पानी, खेती और बिजली का सोर्स है. भारतीय हिस्से में रहने वाली करीब 3.9 करोड़ आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नदी पर निर्भर है. बता दें क्षेत्र के लगभग 70% लोग कृषि से जुड़े हैं और धान, चाय जैसी प्रमुख फसलों की सिंचाई इसी नदी से होती है. इसके अलावा, नदी की बाढ़ उपजाऊ मिट्टी लाकर खेतों की उर्वरता बढ़ाती है. ऊर्जा के क्षेत्र में भी ब्रह्मपुत्र बेसिन में भारत की कुल जलविद्युत क्षमता का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है, जिसमें सबसे बड़ी क्षमता अरुणाचल प्रदेश में है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इस तरह की बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के जोखिम को और बढ़ा सकता है. भविष्य में सूखे के मौसम में नदी का जलस्तर कम होने और मानसून के दौरान अचानक अधिक पानी छोड़े जाने से भीषण बाढ़ और पानी की कमी जैसी दोहरी समस्या पैदा हो सकती है. डैम बनने से नदी के साथ बहने वाली गाद भी कम हो सकती है, जिससे डेल्टा क्षेत्रों में कटाव बढ़ेगा और समुद्र का बढ़ता जलस्तर तटीय इलाकों के लिए ज्यादा खतरनाक बन सकता है.
इंडस, गंगा, मेकांग और नील जैसी अंतरराष्ट्रीय नदियों को लेकर कई देशों के बीच लंबे समय से विवाद हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (IWRM) जैसे समग्र मॉडल को अपनाना चाहिए. ऑस्ट्रेलिया के मरे-डार्लिंग बेसिन और मेकांग नदी आयोग जैसे मॉडल बताते हैं कि पारदर्शी डेटा शेयरिंग, सभी हितधारकों की भागीदारी और बहुपक्षीय सहयोग से नदी विवादों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है. साथ ही भारत-पाकिस्तान की सिंधु जल संधि जैसे पुराने समझौतों को भी जलवायु परिवर्तन और नई तकनीकों के साथ अपडेट करने की जरूरत बताई है.

1. चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर डैम क्यों बना रहा?
चीन तिब्बत में जलविद्युत उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मेगा डैम बना रहा है.
2. चीन के ब्रह्मपुत्र डैम से भारत पर असर पड़ेगा?
इस सवाल का जवाब है – हां. इससे पानी के प्रवाह, बाढ़ प्रबंधन, पर्यावरण और पूर्वोत्तर भारत की जल सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.
3. क्या भारत सैटेलाइट से चीन के ब्रह्मपुत्र डैम की निगरानी कर सकता है?
इसका जवाब भी हां है. सैटेलाइट, रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक से भारत रियल टाइम में नदी और डैम की गतिविधियों पर नजर रख सकता है.
4. भारत के लिए ब्रह्मपुत्र नदी क्यों जरूरी है?
बता दें ब्रह्मपुत्र पूर्वोत्तर भारत में पीने के पानी, सिंचाई, खेती और जलविद्युत का प्रमुख स्रोत है.
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गार्गी संतोष Zee Media के India.com में सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड न्यूज सेक्शन संभालती हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, स्पोर्ट्स और वायरल … और पढ़ें
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