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Uttar Pradesh News: रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. यहां बिना नक्शा पास कराए बने 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए हैं. इसके साथ ही परिसर की पीडब्ल्यूडी सड़क को भी आम जनता के लिए खोल दिया गया है.
आपको बता दें कि रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अध्यक्ष और जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने एक अहम सुनवाई के बाद जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बिना स्वीकृत मानचित्र के अवैध रूप से बनाए गए 38 भवनों को खुद ढहाने के लिए प्रबंधन को 15 दिनों का समय देते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है. ऐसे में बुलडोजर एक्शन की आशंका जताई जा रही है.
इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने वर्ष 2016-17 में करीब 13.50 करोड़ रुपये की सिविल लागत से बनी साढ़े तीन किलोमीटर लंबी सड़क को आम जनता के इस्तेमाल के लिए खोलते हुए मुख्य गेट पर ‘आम रास्ता’ का बोर्ड लगा दिया है. यह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नियमों के उल्लंघन और अवैध कब्जे को हटाने के लिए की गई है.
40 में से केवल दो भवनों का नक्शा स्वीकृत
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सुनवाई और पूरी जांच के बाद सामने आया कि जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 40 भवनों का निर्माण किया गया है. इनमें से केवल दो भवनों का ही मानचित्र जिला पंचायत से स्वीकृत कराया गया था, जिससे स्पष्ट है कि प्रबंधन को नियमों की पूरी जानकारी थी. शेष 38 भवनों का निर्माण बिना किसी स्वीकृत नक्शे के किया गया, जिसके कारण इन्हें अवैध निर्माण मानते हुए गिराने का आदेश पारित किया गया है.
छात्रों के लिए लगाया गया सहायता कैंप
यूनिवर्सिटी परिसर में अवैध निर्माण के खिलाफ होने वाली इस बड़ी कार्रवाई से वहां पढ़ रहे छात्र-छात्राओं में किसी तरह की घबराहट या पैनिक न फैले, इसके लिए प्रशासन के आदेश पर यूनिवर्सिटी के बाहर एक विशेष कैंप लगाया गया है. इस कैंप में यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और शिक्षक खुद मौजूद रहकर बच्चों को जागरूक कर रहे हैं. प्रशासन की इस अनूठी पहल से विश्वविद्यालय के बाहर सुबह से ही हलचल काफी तेज देखी जा रही है.
करोड़ों की सरकारी सड़क पर अब चलेगा आम आदमी
सपा नेता आजम खान के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के अंदर बनी सड़क को लेकर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता किशन वीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में करीब 16 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस 3.30 किलोमीटर फोरलेन सीसी मार्ग का निर्माण कराया गया था. साल 2019 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने गेट बंद कर आम जनता और विभाग का रास्ता रोक दिया था. अब अदालती कानूनी प्रक्रियाओं के बीच विभाग ने गेट पर बोर्ड लगाकर इस सरकारी रास्ते को जनता के लिए बहाल कर दिया है.
15 दिनों का मिला अल्टीमेटम
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह पूरा क्षेत्र वर्ष 2024 से आरडीए के अधिकार क्षेत्र में आ चुका है. फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15 दिन की मोहलत दी गई है कि वे स्वयं ही इन अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर लें. यदि निर्धारित अवधि के भीतर अवैध निर्माण को नहीं हटाया गया, तो रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) पुलिस बल के सहयोग से खुद इन सभी 38 भवनों को जमींदोज करने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर देगा.
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