कमजोर मानसून और कम स्टॉक से भारत में चीनी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने की आशंका – ChiniMandi

नई दिल्ली: भारत में त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं। उद्योग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि, कमजोर मानसूनी बारिश और चीनी के कम भंडार के कारण मिल-गेट कीमतें पहली बार 50 रुपये प्रति किलोग्राम के पार जा सकती हैं। चीनी कारोबारी सुधीर भालोटिया ने बताया कि, उत्तर प्रदेश में मिल-गेट चीनी की कीमतें पहले ही बढ़कर 4,400-4,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं। पिछले एक महीने में कीमतों में करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसी अवधि में दिल्ली में थोक कीमतें भी बढ़कर 4,750-4,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि, अक्टूबर में नए चीनी सीजन की शुरुआत तक मिल-गेट कीमतें बढ़कर 5,000-5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती हैं। यदि मिल-गेट कीमतें 50 रुपये प्रति किलोग्राम के पार जाती हैं, तो थोक कीमतें 55 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती हैं, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा। एग्रीकॉर्प इंटरनेशनल के रिसर्च प्रमुख इंदरजीत पॉल ने कहा कि, मौजूदा बाजार परिस्थितियों में मिल-गेट चीनी की कीमतों के 50 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर जाने की संभावना और मजबूत हुई है। पॉल ने कहा, तकनीकी रूप से चीनी की कीमतें लंबे समय से जारी सीमित दायरे से बाहर निकल चुकी हैं और नए उच्च स्तर पर कारोबार कर रही हैं। बाजार का रुख तेजी वाला बना हुआ है।
बाजार से जुड़े लोगों ने इस तेजी का कारण 2025-26 सीजन में सामान्य से कम मानसूनी बारिश के चलते चीनी उत्पादन घटने की आशंका को बताया है। आईग्रेन इंडिया के निदेशक राहुल चौहान ने कहा कि, गन्ने के उत्पादन में कमी की आशंकाओं ने चीनी की कीमतों को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा, अगर मानसून में जल्द सुधार नहीं हुआ और गन्ने का उत्पादन प्रभावित हुआ, तो आने वाले महीनों में चीनी की आपूर्ति कम हो सकती है, जिससे कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। सुधीर भालोटिया ने बताया कि, इस सीजन में चीनी को एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट करने पर लगी पाबंदियों में ढील के बाद उत्पादन 3 करोड़ टन से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, अब इस अनुमान को घटाकर 2.8-2.85 करोड़ टन कर दिया गया है।
उन्होंने अनुमान लगाया कि, सितंबर के अंत तक देश में चीनी का क्लोजिंग स्टॉक 10-15 लाख टन रह सकता है, जबकि भारत में हर महीने चीनी की खपत 22-25 लाख टन है। उन्होंने कहा कि अगर अक्टूबर में नए पेराई सीजन की शुरुआत में चीनी उत्पादन धीमा रहता है, तो देश को आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे कीमतों पर और बढ़ोतरी का दबाव बनेगा। इंदरजीत पॉल ने कहा कि कम कैरीओवर स्टॉक और मानसून को लेकर अनिश्चितता बाजार को समर्थन दे रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतें लंबे समय तक 50 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर बनी रहेंगी या नहीं, यह जुलाई और अगस्त में मानसून की प्रगति तथा अगले सीजन में चीनी उत्पादन को लेकर बाजार की उम्मीदों पर निर्भर करेगा।


null

© Copyright 2026 JK India eAgriTech Ltd.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News