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चंडीगढ़, 19 जनवरी (ट्रिन्यू)
Adventures Places in India : कुछ लोगों को रोमांच और खतरों से भरी जगहों को एक्सप्लोर करने का बहुत शौक होता है। वैसे एडवेंचरस डेस्टिनेशन पर जाने का मजा भी अलग होता है। जैसे-जैसे 2025 की शुरुआत हो रही है, यात्री सामान्य छुट्टियों को पीछे छोड़कर कुछ एडवेंचर की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में आप भी आम शहर की सैर या समुद्र तट की छुट्टियों को भूल जाइए… इस साल उन जगहों की खोज करने का समय है, जो आपको यह कहने पर मजबूर कर दें कि, “क्या यह सच में है?”
आज हम आपको कुछ ऐसी एडवेंचर्स जगहों के बारे में बताएंगे कि जिसे देख आप भी यकीन नहीं कर पाएंगे कि क्या वाकई ये जगहें भारत में मौजूद है। हालांकि ध्यान रखें कि ऐसी जगहों पर कभी भी अकेला ना जाएं , हमेशा ग्रुप में ही जाएं।
सेला पास
‘आइसबॉक्स ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर यह जगह समुद्र तल से करीब 4,400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस बर्फीले स्वर्ग में लगभग पूरे साल बर्फ रहती है इसलिए यहां का तापमान करीब -15 डिग्री तक चला जाता है। यहां आपको कई एडवेंचर्स एक्टिविटी का मजा लेना का मौका मिलेगा।
दूधसागर वाटर फाल्स
दूधसागर वाटर फाल्स को देखकर आपको ऐसा लगेगा कि मानो पहाड़ों से दूध गिर रहा हो। यही वजह है कि यहां हर साल हजारों की संख्या में टूरिस्ट आते हैं। हरे भरे जंगलों से घिरा यह झरना 310 मीटर की ऊंचाई से गिरता है। टेढ़े-मेढ़े और एक तरफ की खाई से होकर गुजरने वाला यहां पहुंचने का रास्ता आपको रोमांच से भर देगा।
याना की गुफाएं
काले रंग के चूना पत्थरों से बनी इन अनोखी चट्टानों की बनावट देखकर हर किसी का दिमाग घूम जाता है। कुमता के जंगलों के बीच में स्थित, ये अद्भुत चट्टानें 390 फीट ऊंचे हैं। हरे-भरे जंगल के बीच में से होकर गुजरने वाला यहां का नजारा मनमोह लेता है।
स्पीति वैली-हिमाचल
मिट्टी के गर्म रेगिस्तान को आपने कई बार देखें होंगे, लेकिन हिमाचल प्रदेश में स्थित एक ठंडा रेगिस्तान देखने का मजा आप कभी नहीं भूल पाएंगे। 12500 फीट की ऊंचाई पर स्थित स्पीति घाटी में आपको अनोखी बनावट वाले घर देखने को मिलेंगे। यहां आपको किसी दूसरे ग्रह में होने का अहसास होता है।
मैग्नेटिक हिल-लद्दाख
लद्दाख की मैग्नेटिक हिल का रहस्य वैज्ञानिक भी अभी तक नहीं सुलझा पाए हैं। दरअसल, यह भारत की इकलौती ऐसी जगहे हैं, जहां गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता। यहां मौजूद एक पहाड़ी की सड़क से नीचे जाती गाड़ियां भी ऊपर आने लगती हैं। यही वजह है कि टूरिस्ट इस जगह को एक्सपलोर करना बहुत पसंद करते हैं।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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