देश में चीनी की खपत 20 लाख टन घटी, उद्योग ने निर्यात बढ़ाने की मांग की – ChiniMandi

पुणे (महाराष्ट्र): भारत में घरेलू चीनी की खपत में करीब 20 लाख टन की कमी आई है, जिससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने रविवार को यह जानकारी दी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पाटिल ने कहा कि, उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, जिसमें कम चीनी और शुगर-फ्री उत्पादों की बढ़ती मांग भी शामिल है, के कारण घरेलू स्तर पर चीनी की खपत कम हुई है। इसके चलते उद्योग ने केंद्र सरकार से नीतिगत सहयोग की मांग की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के चीनी आयुक्त संजय कोलते और NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे भी मौजूद थे।
पाटिल ने कहा कि, करीब 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में सामान्य तौर पर सालाना लगभग 3 करोड़ टन चीनी की खपत होनी चाहिए, लेकिन वास्तविक घरेलू खपत घटकर करीब 2.8 करोड़ टन रह गई है। उन्होंने कहा, चीनी की खपत में गिरावट से चीनी मिलों की वित्तीय व्यवहार्यता प्रभावित हो रही है। इससे निपटने के लिए सरकार को अतिरिक्त चीनी निर्यात की अनुमति देनी चाहिए और एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के अधिक डायवर्जन की अनुमति देनी चाहिए। महासंघ ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने और 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी देने का आग्रह किया है।
पाटिल ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की उद्योग की लंबे समय से लंबित मांग को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में कुल ₹650 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के बावजूद चीनी का MSP ₹3,100 प्रति क्विंटल पर अपरिवर्तित है। उन्होंने कहा, बढ़ती उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाकर कम से कम ₹4,100 प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए।
पाटिल ने बताया कि चीनी उद्योग ने क्षेत्र के लिए 10 साल का रोडमैप तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रस्तावों की जांच करने और उद्योग के दीर्घकालिक विकास के लिए नीतिगत उपायों की सिफारिश करने हेतु एक समिति गठित की है। इंदापुर स्थित कर्मयोगी शंकरराव पाटिल सहकारी चीनी मिल के प्रबंधन को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पाटिल ने कहा कि सदस्यों की आम सभा से मंजूरी लेने और सरकारी नियमों का पालन करने के बाद मिल एक सहयोगी व्यवस्था के तहत निजी कंपनी को सौंपा गया है। उन्होंने इस व्यवस्था को महाराष्ट्र की किसी सहकारी चीनी मिल में निजी निवेश से जुड़ा पहला ऐसा सहयोगी मॉडल बताया।


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