पश्चिम एशिया संकट का असर: 'खाद सब्सिडी का 40% हिस्सा 3.5 महीने में ही खर्च हुआ', राज्यसभा में बोली सरकार – Jagran

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के शुरुआती साढ़े तीन महीनों में ही खाद सब्सिडी का 40% खर्च कर दिया है। वैश्विक तनाव और बढ़ी कीमतों के कारण इस साल कुल सब्सिडी …और पढ़ें
भारत में खाद सब्सिडी।
चालू वित्त वर्ष में 40% खाद सब्सिडी खर्च।
वैश्विक कीमतों के कारण सब्सिडी बजट बढ़ेगा।
किसानों को सस्ती दरों पर मिल रही खाद।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष (2026-27) के शुरुआती साढ़े तीन महीनों में ही सरकार ने खाद सब्सिडी का लगभग 40% हिस्सा, यानी 70,709 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजार में खाद की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे इस साल सरकार का सब्सिडी का कुल बजट तय सीमा से ज्यादा होने की पूरी संभावना है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
मामले में मंत्रालय ने बताया कि किसी एक देश पर निर्भरता कम करने के लिए विदेशों में भारतीय मिशनों के माध्यम से नए सप्लायर्स की पहचान की जा रही है, ताकि देश में खाद की किल्लत न हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में खाद की मांग को पूरा करने के लिए सब्सिडी के लिए पर्याप्त फंड मौजूद है।
मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया है कि सरकार ने इस साल के लिए करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी तय की थी। वहीं बात अगर पिछले सरकार के खर्च की की जाए तो मंत्रालय ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में सब्सिडी का कुल खर्च 2.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
इतना ही नहीं अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया और अन्य खादों के दाम ऊंचे बने हुए हैं, इसलिए इस साल भी सब्सिडी का खर्च बजट अनुमान से अधिक रहेगा।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बहुत ज्यादा होने के बावजूद सरकार किसानों को सस्ते दामों पर ही खाद उपलब्ध करा रही है। यूरिया की 45 किलो की बोरी किसानों को 266.50 रुपये में ही मिल रही है, जबकि इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 4000 रुपये प्रति बोरी से भी ज्यादा है। यह दाम मार्च 2018 से बिना किसी बदलाव के स्थिर हैं।
वहीं वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद, डीएपी की 50 किलो की बोरी किसानों को पहले की तरह 1350 रुपये में ही दी जा रही है। कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत पिछले महीने 572 डॉलर प्रति टन रही, जो पिछले साल जून 2025 की तुलना में 45% अधिक है। हालांकि, देश में यूरिया का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News