प्रयागराज, अनिकेत यादव। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत स्नातक पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। अब बीए के विद्यार्थी असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या’ के स्थान पर भीष्म साहनी का नाटक ‘कबीरा खड़ा बाजार में’ पढ़ेंगे। पाठ्यक्रम में हिंदी साहित्य के इतिहास और विभिन्न विधाओं से जुड़ी कई नई रचनाओं को भी शामिल किया गया है।
विभाग के प्रो. कुमार वीरेंद्र ने बताया कि हिंदी विषय के करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। यह बदलाव बोर्ड ऑफ बैचलरेट और फैकल्टी बोर्ड से पारित हो चुका है। इसी के तहत हिंदी विषय के बीए पाठ्यक्रम के द्वितीय सेमेस्टर में विद्यार्थियों को हिंदी नाटक के अंतर्गत भीष्म साहनी की रचना ‘कबीरा खड़ा बाजार में’ पढ़ाई जाएगी। वहीं, इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर विपिन अग्रवाल के एकांकी ‘तीन अपाहिज’ को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को यह एकांकी भी द्वितीय सेमेस्टर में ही पढ़नी होगी।
तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। तुलसीदास के ‘अयोध्या’ पाठ के साथ अब ‘चित्रकूट ज्ञान सभा’ को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा साहित्य के इतिहास से जुड़े पाठ्यक्रम में लेखन के स्रोत और परंपरा को भी शामिल किया गया है। इसमें विशेष रूप से प्रयागराज के साहित्यकार रामकुमार वर्मा, लक्ष्मीसागर और मोहन अवस्थी को स्थान दिया गया है। पाठ्यक्रम में किए गए इन बदलावों से विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य के विभिन्न कालखंडों, विधाओं और रचनाकारों को व्यापक दृष्टिकोण से समझने में मदद मिलेगी। एनईपी के तहत विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक, बहुविषयक और समसामयिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में हिंदी विभाग ने भी बीए के पाठ्यक्रम की समीक्षा कर उसमें बदलाव किए हैं। विभागीय स्तर पर किए गए इन संशोधनों के बाद से विद्यार्थियों को संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन कराया जाएगा।
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