फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है? यह कैसे काम करता है और यह बाकी अदालतों से अलग कैसे होता है? सवाल यह भी है कि पेपर लीक को लेकर पीएम मोदी के एलान के बाद …और पढ़ें
पीएम मोदी ने किया फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का एलान।
क्या होता है फास्ट ट्रैक कोर्ट?
पीएम मोदी ने पेपर लीक मामले में किया है गठन का एलान।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों ने देश भर के युवाओं में भारी आक्रोश भर दिया है। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन ने पूरे देश की सियासत को सातवें आसमान पर पहुंचा है।
ऐसे में उठते सवालों के बीच गुरुवार तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा एलान किया। पीएम मोदी ने घोषणा की है कि पेपर लीक के दोषियों को त्वरित और कड़ी सजा दिलाने के लिए विशेष ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ गठित किए जाएंगे।
बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक जारी विरोध प्रदर्शन के बीच पीएम मोदी के इस एलान ने एक साथ कई सारे सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आम जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है, यह सामान्य अदालतों से कैसे अलग काम करता है और पेपर लीक के संगठित मामलों में इसका क्या असर पड़ेगा? आइए हम आपको बताते हैं।
सामान्य शब्दों में कहें तो ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एक विशेष प्रकार की अदालतें होती हैं, जिसका गठन किसी खास श्रेणी के मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए किया जाता है। इस बात को ऐसे समझिए कि भारत की पारंपरिक न्यायिक प्रणाली में लाखों केस लंबित पड़े रहते हैं, जिसकी वजह से मुकदमों के फैसले में सालों-साल लग जाते हैं।
ऐसे में इस कोर्ट के गठन का उद्देश्य दुष्कर्म, पोक्सो, भ्रष्टाचार या अब पेपर लीक जैसे गंभीर या संवेदनशील मामलों की सुनवाई बिना किसी देरी के, समयबद्ध सीमा के भीतर पूरी करना। इन अदालतों की स्थापना राज्य सरकारें संबंधित उच्च न्यायालयों के परामर्श से करती हैं।
इस बात को ऐसे समझिए कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की कार्यप्रणाली आम अदालतों की तुलना में काफी अलग और तेज होती है। इसके काम करने का तरीका अलग-अलग बिंदुओं पर आधारित है।
इसमें अहम बात यह है कि इन अदालतों के पास मुकदमों का अंबार नहीं होता। इनमें केवल वही मामले भेजे जाते हैं जिनके लिए यह कोर्ट बनाया गया है। उदाहरण के लिए, यदि पेपर लीक के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनता है, तो वहां केवल पेपर लीक से जुड़े केस ही सुने जाएंगे।
ये अदालतें सामान्य अदालतों से इसलिए भी अलग होती हैं, क्योंकि सामान्य अदालतों में तारीखों के बीच महीनों का अंतर होता है। इसके ठीक उलट फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों की सुनवाई अक्सर प्रतिदिन के आधार पर होती है।
इसके अलावा इन मामलों में जांच एजेंसी पुलिस या सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने से लेकर गवाहों के बयान दर्ज करने और अंतिम फैसला सुनाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा दी जाती है। खासबात यह है कि अनावश्यक स्थगन की अनुमति नहीं होती।
इस सवाल के जवाब को ऐसे समझिए कि देश में नीट सहित कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाता है। वर्तमान में सरकार के पास लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 (सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024) जैसा सख्त कानून मौजूद है।
हालांकि मुख्य चुनौती धीमी न्यायिक प्रक्रिया थी। जांच और ट्रायल में वर्षों बीत जाने से मुख्य सरगना और शिक्षा माफिया अक्सर कानून के शिकंजे से बच निकलते थे या उन्हें आसानी से जमानत मिल जाती थी।
ऐसे में अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का एलान किया, तब इसका सीधा मकसद यह संदेश देना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले शिक्षा माफिया को तुरंत सजा दी जाएगी। अब केंद्रीय कानून मंत्रालय और गृह मंत्रालय राज्य सरकारों तथा संबंधित हाई कोर्ट्स के साथ मिलकर इन विशेष अदालतों के गठन की रूपरेखा तैयार करेंगे।
इन अदालतों में तेजी से सुनवाई के लिए सेवानिवृत्त या समर्पित न्यायिक अधिकारियों/जजों को तैनात किया जाएगा। पेपर लीक मामलों की पैरवी के लिए सरकार विशेष सरकारी वकीलों की नियुक्ति करेगी ताकि केस की मजबूती से सुनवाई हो सके।
इस बात को ऐसे समझिए कि जब दोषियों को महीनों के भीतर सजा और जेल होने लगेगी, तो पेपर लीक सिंडिकेट और गिरोहों में कानून का खौफ पैदा होगा। इतना ही नहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले करोड़ों युवाओं और उनके अभिभावकों का देश की परीक्षा प्रणाली और न्याय व्यवस्था पर विश्वास दोबारा मजबूत होगा।
इसके अलावा त्वरित अदालतें होने से पुलिस और जांच एजेंसियां, जैसे CBI को भी तय समय में पुख्ता सबूत और चार्जशीट पेश करनी होगी, जिससे जांच में ढिलाई की गुंजाइश खत्म होगी और फिर जल्द न्याय मिलने से रद्द हुई परीक्षाओं का आयोजन भी बिना लंबे इंतजार के दोबारा संभव हो पाएगा।
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