आरपीएससी की प्रथम श्रेणी (हिंदी) भर्ती-2022 में फर्जी एमए (हिंदी) डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी पाने के मामले में एसओजी ने डिग्री उपलब्ध कराने वाले दलाल अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया और मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा को बुधवार को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 25 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया है।
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि चयनित जालोर निवासी अभ्यर्थी कमला कुमारी की मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री सत्यापन में फर्जी पाई गई थी। इस संबंध में मार्च-2024 में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसमें सामने आया कि अशोक विश्नोई ने महेंद्र सिंह राव के माध्यम से कमला कुमारी के भाई दलपत सिंह से संपर्क किया और मेवाड़ यूनिवर्सिटी से फर्जी मार्कशीट व डिग्री उपलब्ध करवाई। अशोक को 21 जुलाई को प्रोडक्शन पर गिरफ्तार किया। इससे पहले उसे फर्जी डिग्री से जुड़े अन्य मामले में गिरफ्तार किया था।
मेवाड़ विवि के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक शर्मा ने फर्जी डिग्री तैयार कराने और उपलब्ध कराने में सहयोग किया। पूछताछ जारी है। कमला व ब्रह्मा से खुल गया नेटवर्क, अब तक 16 पकड़े यह पूरा नेटवर्क कमला व ब्रह्मा की गिरफ्तारी के बाद खुला। दोनों ने दस्तावेज सत्यापन में आरपीएससी को मेवाड़ विवि की डिग्री प्रस्तुत की थी। जबकि आवेदन के समय ओपन विवि कोटा की डिग्री का जिक्र किया था। हालांकि आरपीएससी से गड़बड़ी नहीं पकड़ पाई। बाद में जब आरपीएससी ने दोनों कि डिग्रियों का 2 बार मेवाड़ विवि से सत्यापन कराया। वहां से डिग्री का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं होना बताया। इस पर दोनों के विरुद्ध अजमेर सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज कराया और हाथोंहाथ गिरफ्तारी भी हुई। इस मामले में अब तक 16 गिरफ्तार हो चुके हैं।
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