नीदरलैंड में शुरू हुए वर्ड मास्टर्स हॉकी टूर्नामेंट 40 से अधिक आयु वर्ग में भारत ने साउथ अफ्रीका को 4-0 से हरा दिया। इस मैच में दो गोल लुधियाना के गांव घवद्दी के रहने वाले और पीएसपीसीएल के कर्मचारी रविंदर सिंह ने किए हैं। एक अगस्त तक चलने वाले टूर्ना
बता दें कि पिछले साल उन्होंने हांगकांग में आयोजित एशियन कॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप में भारतीय मास्टर्स हॉकी टीम की ओर से खेलते हुए अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। वह टूर्नामेंट में 6 गोल कर टॉप स्कोरर बने थे।
खिद्दो-खूंडी खेल में मेरी स्पीड देख मुझे हॉकी टीम में शामिल किया..
जब मैं 8 साल का था तब गांव में खिद्दो-खूंडी खेल खेलता था। जो हॉकी जैसा गेम्स था और गांवों में काफी लोकप्रिय था। खेल में मेरी स्पीड काफी तेज थी। मेरी स्पीड को देखते हुए ही मुझे गांव की हॉकी टीम में शामिल कर लिया। क्योंकि हमारा गांव घवद्दी हॉकी के लिए काफी प्रसिद्ध था और हर घर में हॉकी प्लेयर है।
मैंने गांव की टीम की तरफ से अलग-अलग कई ग्रामीण टूर्नामेंट खेले। इस दौरान घर वालों ने भी मेरा पूरा सहयोग दिया। मुझे कोई परेशानी नहीं आने दी और कहा कि मैं जिसमें कैरियर बनाना चाहता हूं, वही काम करूं। मेरे पिता किसान थे। 1998-99 में लुधियाना की टीम में मेरा चयन हुआ।
मैंने राज्य स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया। बाद में स्पोर्ट्स स्कूल जालंधर में मेरा दाखिला हो गया और कोच मलकीत सिंह से मैंने ट्रेनिंग ली। कोच कृपाल सिंह मठारू और ओलंपियन गुनदीप कुमार ने भी मेरे खेल को निखारा। जिसकी बदौलत मैं राष्ट्रीय स्तर पर पांच बार नेहरू हॉकी टूर्नामेंट खेला, जिसमें 4 खिताब जीते और अपनी कप्तानी में जीत की हैट्रिक भी बनाई।
बीएसएफ, सीआरपीएफ, जगराओं पुलिस और पंजाब एंड सिंध बैंक अकादमी जैसी प्रतिष्ठित टीमों का प्रतिनिधित्व किया। कलकत्ता लीग में मैंने तीन बार भाग लिया और दो बार जीत हासिल की। अभी मैं पीएसपीसीएल हॉकी टीम के कोच की जिम्मेदारी संभाल रहा हूं। साथ ही रोजाना गांव में 60 से 65 खिलाड़ियों को फ्री में हॉकी सिखा रहा हूं। -जैसे रविंदर सिंह ने बताया
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