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क्या किसी शहर की अच्छी जिंदगी सिर्फ ऊंची सैलरी, बेहतरीन हेल्थकेयर और आधुनिक तकनीक से तय होती है? जर्मनी में रहने वाले एक भारतीय युवक का मानना है कि इसका जवाब ‘नहीं’ है. उनका कहना है कि यूरोप की असली ताकत उसकी लोगों को केंद्र में रखकर की गई शहरी प्लानिंग है. इस मुद्दे पर बनाया गया उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हजारों लोग इस पर अपनी राय दे रहे हैं.
जर्मनी में रहने वाले सत्यम सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो की शुरुआत में वह कहते हैं कि अगर मैं कहूं कि यूरोप की बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ का राज न तो हेल्थकेयर है और न ही ऊंची सैलरी, तो क्या आप मानेंगे? आइए, एक छोटी-सी चीज से समझाता हूं कि यूरोप भारत से इतना अलग क्यों महसूस होता है.
वीडियो में सत्यम अपने घर के पास बने एक पार्क में बैठे नजर आते हैं. वह बताते हैं कि वहां साफ-सफाई, हरियाली और शांत माहौल के बीच बच्चे खेल रहे हैं, लोग टहल रहे हैं और वह आराम से बैठकर अपनी डायरी लिख पा रहे हैं. उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक पार्क नहीं बल्कि शहरों की सोच को दिखाने वाला उदाहरण है.
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‘यहां सड़कें सिर्फ कारों के लिए नहीं बनीं’
सत्यम का कहना है कि यूरोप के कई शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन किया गया है कि पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों को बराबर महत्व मिले. उनके मुताबिक, कई जगह फुटपाथ सड़क से भी ज्यादा चौड़े हैं और साइकिल के लिए अलग ट्रैक बनाए गए हैं. इससे लोग छोटी दूरी के लिए कार पर निर्भर नहीं रहते.
देखें वीडियो
A post shared by Satyam Singh | Nutritionist (@buildwithsatyam)
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शहरी विकास (Urban Planning) के विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि चौड़े फुटपाथ, सुरक्षित साइकिल लेन, सार्वजनिक पार्क और बेहतर सार्वजनिक परिवहन किसी भी शहर में लोगों की जीवन गुणवत्ता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर से ट्रैफिक का दबाव कम होता है, प्रदूषण घटता है और लोगों की शारीरिक गतिविधि बढ़ती है.
सोशल मीडिया पर बंटी राय
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कई यूजर्स ने कहा कि भारत के शहरों में भी लोगों को केंद्र में रखकर सड़कें और सार्वजनिक स्थान विकसित किए जाने चाहिए. वहीं कुछ लोगों का कहना था कि भारत और यूरोप की आबादी, जनसंख्या घनत्व और शहरी चुनौतियां अलग हैं, इसलिए दोनों की सीधी तुलना करना उचित नहीं है.
हालांकि, एक बात पर अधिकांश लोग सहमत नजर आए कि बेहतर फुटपाथ, सुरक्षित साइकिल लेन, साफ-सुथरे पार्क और मजबूत सार्वजनिक परिवहन किसी भी शहर की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
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