CJP आंदोलन खत्म पर घर नहीं लौटे अभिजीत दीपके, क्या वजह; मंत्री ने मांगी सुरक्षा – Hindustan

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने रविवार को कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके क्षेत्र के रहने वाले और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक क्रांति शुरू की है, और उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए। औरंगाबाद पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र के प्रभारी मंत्री शिरसाट छत्रपति संभाजीनगर के वालुज एमआईडीसी इलाके में दीपके के परिवार से मिलने के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।
युवाओं के नेतृत्व वाले सीजेपी को शनिवार को उस समय एक बड़ी जीत मिली, जब परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों और नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर उनके 36 दिनों के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। शिरसाट ने कहा कि दीपके को सुरक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सीजेपी द्वारा विरोध प्रदर्शन वापस लेने के बावजूद दीपके अभी तक घर नहीं लौटे हैं, क्योंकि उन्हें टाइफाइड हो गया है।
मंत्री ने कहा, ‘उनके माता-पिता परेशान थे, क्योंकि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें। वह परिवार की तरह हैं और मैं यहां केवल प्रभारी मंत्री के तौर पर नहीं आया हूं। अभिजीत के महाराष्ट्र पहुंचने पर उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए। मैं इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करूंगा।’
राज्य की ‘महायुति’ सरकार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी शिवसेना के नेता शिरसाट ने कहा कि उन्होंने पहले दीपके के परिवार से मुलाकात इसलिए नहीं की, क्योंकि इसे राजनीतिक नजरिए से देखा जा सकता था। उन्होंने कहा कि वह दीपके के परिवार को 25 साल से ज़्यादा समय से जानते हैं और उन्होंने 30 साल के कार्यकर्ता की सेहत के बारे में भी जानकारी ली थी।
मंत्री ने बताया कि बोस्टन विश्वविद्यालय में जनसंपर्क विषय में स्नातकोत्तर करने वाले दीपके को अमेरिका में नौकरी की पेशकश भी गई थी और तभी सीजेपी की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा, ‘उनके माता-पिता चाहते थे कि वह नौकरी कर लें, लेकिन अभिजीत की इच्छा छात्रों के लिए कुछ करने की थी।’ मंत्री ने इस बात पर भी गर्व जताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के एक निवासी ने देश में क्रांति की शुरुआत की है।
शिरसाट ने कहा, ‘आंदोलन खत्म हो गया है और प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें पूरी हो गई हैं। लेकिन मेरे निर्वाचन क्षेत्र के एक निवासी ने क्रांति की शुरुआत की। इसके अलावा उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और वे इस आंदोलन का श्रेय भी नहीं लेना चाहते। मेरे बेटे (दीपके) को सफलता इसलिए मिली, क्योंकि समाज के लोगों ने उसका समर्थन किया।’
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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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