क्या है एयर टर्बुलेंस, जिससे एअर इंडिया का प्लेन आसमान में डगमगाने लगा – Aaj Tak News

Feedback
4 अगस्त 2026 को एअर इंडिया की फ्लाइट एआई2379 फुकेट से दिल्ली आ रही थी. क्रूज के दौरान एक छोटा इन-फ्लाइट टर्बुलेंस हुआ जिसमें ऊंचाई में बदलाव आया. विमान दिल्ली में सुरक्षित उतरा और सभी यात्री तथा क्रू सुरक्षित उतरे. कोई गंभीर चोट नहीं हुई.  
कुछ यात्रियों और क्रू सदस्यों को मामूली चोटों के लिए एयरपोर्ट पर चिकित्सकीय जांच के लिए भेजा गया है. एअर इंडिया ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए प्रभावितों को सहयोग देने और जांच में अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया. यह घटना एयर टर्बुलेंस को समझने का अच्छा मौका देती है.
यह भी पढ़ें: क्या जमीनी हमले का ट्रंप का मिशन हुआ फेल, ईरान ने किया सनसनीखेज दावा
एयर टर्बुलेंस हवा की अनियमित और अशांत गति है जो विमान को अचानक ऊपर-नीचे या इधर-उधर झटका देती है. सामान्य उड़ान में हवा अपेक्षाकृत स्थिर होती है लेकिन कभी-कभी हवा के अलग-अलग हिस्सों की गति, दिशा या तापमान में अंतर के कारण अशांति पैदा होती है. 
यात्री इसे झटकों, अचानक गिरने या उठने के रूप में महसूस करते हैं. हल्की टर्बुलेंस में सिर्फ कंपन होता है जबकि मध्यम या तेज में पेय पदार्थ गिर सकते हैं. बिना सीट बेल्ट वाले लोग घायल हो सकते हैं. आधुनिक विमान इतने मजबूत बनाए जाते हैं कि सामान्य से लेकर गंभीर टर्बुलेंस भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाती.
टर्बुलेंस क्यों होता है
 what is air turbulence
टर्बुलेंस कई कारणों से पैदा होता है. सबसे आम है थर्मल या कन्वेक्टिव टर्बुलेंस जो गर्म हवा के ऊपर उठने और ठंडी हवा के नीचे गिरने से बनता है. गर्मी में जमीन गर्म होती है तो हवा ऊपर उठती है और अशांति पैदा करती है. पहाड़ी क्षेत्रों में माउंटेन वेव टर्बुलेंस होता है जहां हवा पहाड़ों से टकराकर लहरें बनाती है जो दूर तक फैल सकती हैं.
यह भी पढ़ें: हिंद महासागर में बदल रहा मौसम, दो हफ्ते एक्टिव रहेगा मॉनसून… झमाझम बारिश
 
सबसे खतरनाक और अप्रत्याशित प्रकार क्लियर एयर टर्बुलेंस यानी सीएटी है. यह साफ आसमान में बादल या तूफान के बिना होता है. यह मुख्य रूप से जेट स्ट्रीम के आसपास होता है. जेट स्ट्रीम ऊंचाई पर तेज हवा की धार है जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है. जब तेज हवा वाले क्षेत्र के किनारे पर धीमी हवा मिलती है तो विंड शियर पैदा होता है. 
हवा की गति में अचानक अंतर से भंवर बनते हैं. तापमान में अंतर और घनत्व के बदलाव भी इसे बढ़ाते हैं. ट्रॉपोपॉज नामक परत के आसपास जहां तापमान पैटर्न बदलता है वहां भी गुरुत्वाकर्षण तरंगें टर्बुलेंस पैदा कर सकती हैं. मौसम के मोर्चों पर भी अलग-अलग हवा के द्रव्यमान मिलने से अशांति होती है.
 what is air turbulence
ऊंचाई कब-क्यों कम की जाती है
पायलट टर्बुलेंस महसूस होने पर अक्सर ऊंचाई बदलते हैं. क्लियर एयर टर्बुलेंस आमतौर पर पतली परत में होता है. जेट स्ट्रीम के आसपास यह 2000 फीट ऊपर या नीचे जाकर अक्सर समाप्त हो जाता है. पायलट मौसम रडार, पायलट रिपोर्ट्स और पूर्वानुमान के आधार पर निर्णय लेते हैं. 
अगर टर्बुलेंस एक तरफ से आ रहा हो तो तापमान देखकर पता लगाते हैं कि विमान जेट स्ट्रीम के ऊपर है या नीचे और फिर सुरक्षित ऊंचाई चुनते हैं. ऊंचाई बदलने से विमान अशांत क्षेत्र से निकल जाता है क्योंकि हवा की परतें अलग-अलग होती हैं. एअर इंडिया की फ्लाइट में भी क्षणिक ऊंचाई बदलाव इसी कारण रिपोर्ट किया गया. विमान को नीचे लाना या ऊपर ले जाना सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है न कि खतरे का संकेत.
यह भी पढ़ें: CCTV में कैद हुई दहशत, स्वात में पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मघाती धमाके में गई थी 15 लोगों की जान
वैज्ञानिक दृष्टि से टर्बुलेंस हवा की लेमिनर यानी चिकनी प्रवाह से टर्बुलेंट यानी अशांत प्रवाह में बदलाव है. विंड शियर मुख्य कारक है जहां हवा की गति या दिशा अचानक बदलती है. जेट स्ट्रीम में तेज हवा धीमी हवा को काटती है जिससे किनारे अस्थिर हो जाते हैं. 
घनत्व अंतर इसे फिर से स्थिर करने की कोशिश करता है लेकिन मजबूत शियर जीत जाता है तो भंवर बनते हैं. पहाड़ों पर हवा ऊपर उठकर लहरें बनाती है जो टूटकर अशांति पैदा करती हैं. ग्लोबल वार्मिंग से जेट स्ट्रीम मजबूत और अनियमित हो रही है जिससे क्लियर एयर टर्बुलेंस बढ़ने की संभावना बताई जाती है. विमान के पंख लिफ्ट पैदा करते हैं लेकिन अचानक हवा के दबाव में बदलाव से लिफ्ट बदल जाती है और झटके लगते हैं.
 what is air turbulence
टर्बुलेंस से क्या दिक्कतें होती हैं
टर्बुलेंस से सबसे बड़ी समस्या यात्रियों और क्रू की सुरक्षा है. सीट बेल्ट न बांधने पर लोग सीट से उछलकर छत या आसपास की चीजों से टकरा सकते हैं. मामूली से गंभीर चोटें हो सकती हैं जैसे सिर में चोट, हड्डी टूटना या आंतरिक चोट. एअर इंडिया की घटना में भी कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं. 
क्रू सदस्य जो केबिन में घूम रहे होते हैं अधिक जोखिम में रहते हैं. यात्रियों में डर, मतली और असुविधा होती है. कभी-कभी केबिन में सामान गिरता है. विमान की संरचना पर असर दुर्लभ है क्योंकि विमान कठोर परीक्षणों से गुजरते हैं. टर्बुलेंस के लिए डिजाइन किए जाते हैं. फिर भी गंभीर मामलों में निरीक्षण जरूरी होता है. उड़ान में देरी या रूट बदलाव भी हो सकता है.
यह भी पढ़ें: अगले 24 घंटे भारी! बिहार समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, IMD ने दी बड़ी चेतावनी
एयर टर्बुलेंस आम घटना है लेकिन आधुनिक विमानन में इसे सुरक्षित तरीके से संभाला जाता है. फ्लाइट एआई2379 की घटना याद दिलाती है कि सीट बेल्ट हमेशा बांधे रखना चाहिए. पायलट प्रशिक्षण, बेहतर पूर्वानुमान तकनीक और रडार सिस्टम जोखिम कम करते हैं.
क्लियर एयर टर्बुलेंस का पूर्वानुमान अभी भी चुनौती है क्योंकि यह नजर नहीं आता. यात्रियों को शांत रहना चाहिए और क्रू के निर्देशों का पालन करना चाहिए. सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता रहती है. ऐसी घटनाओं से सबक लेकर प्रक्रियाएं और बेहतर होती हैं.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News