अब भारत के नजदीक सेना उतारने की तैयारी में ट्रंप! चीन के करीब ऐसी हिमाकत क्यों? क्या प्लान – Hindustan

पिछले पांच महीनों से ईरान जंग में उलझे दुनिया के सबसे ताकतवर देश कहे जाने वाले अमेरिका की नजर अब बांग्लादेश पर आ टिकी है। अमेरिका अब भारत से सटे बंगाल की खाड़ी में सेना उतारने जा रहा है। इसका मकसद बांग्लादेश के साथ नौसैनिक अभ्यास करना है और धीरे-धीरे बांग्लादेश की हथियारों के लिए चीन पर निर्भरता कम करना है। अमेरिका ने मंगलवार (04 अगस्त) को कहा कि वह अपना अगला नौसैनिक अभ्यास आगामी नवंबर में बांग्लादेश में आयोजित करेगा।
ढाका के सूत्रों ने बताया कि महत्वपूर्ण नौसैनिक अभ्यास ऑपरेशन अफ्लोट रेडीनेस एंड ट्रेनिंग (CARAT) को बांग्लादेश और म्यांमार के तट से दूर बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। इसमें अमेरिकी नौसेना और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की नौसेनाओं के साथ-साथ बांग्लादेश और श्रीलंका भी शामिल है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार भेंट के बाद अमेरिका के पैसिफिक फ़्लीट के प्रमुख एडमिरल स्टीफ़न टी. कोहलर का यह घोषित कदम, अमेरिकी सेना के पैसिफिक कमांड और बांग्लादेशी सेना के संयुक्त जंगल युद्धाभ्यास ‘टाइगर लाइटनिंग 2026’ के तुरंत बाद आया है। यह द्विपक्षीय प्रशिक्षण 19 जुलाई से 31 जुलाई, 2026 तक बांग्लादेश के सिलहट स्थित जलालाबाद छावनी में आयोजित किया गया था।
बांग्लादेशी सेना की पैरा कमांडो ब्रिगेड और अमेरिकी सेना के पैसिफिक कमांड और ओरेगन आर्मी नेशनल गार्ड के सैनिक उस पखवाड़े भर चले अभ्यास में शामिल थे। इसका आयोजन असम सीमा के बहुत निकट किया गया था। एडमिरल कोहलर और प्रधानमंत्री रहमान के बीच मंगलवार को हुई बैठक में बांग्लादेश और अमेरिका के बीच हस्ताक्षर किए जाने के लिए प्रस्तावित जनरल सिक्योरिटी ऑफ मिलिट्री इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस समझौते पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के बीच गोपनीय सैन्य खुफिया जानकारी को सुरक्षित रूप से साझा करने और उसकी रक्षा करने के लिए एक कानूनी संरचना स्थापित होने की उम्मीद है। इस उस पहले कदम के रूप में देखा जा रहा है जिसके बाद वाशिंगटन अपने उन्नत रक्षा उपकरण, जिनमें जेट विमान भी शामिल हैं, बेच सकेगा।
माना जाता है कि अमेरिका ने बांग्लादेश को एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान और एएच-64ई अपाचे आक्रमण हेलीकॉप्टर, साथ ही लॉकहीड निर्मित टीपीवाई-4 भूमि-आधारित वायु रक्षा रडार और एनएएसएएमएस वायु रक्षा मिसाइल देने का प्रस्ताव दिया है। बांग्लादेश एमक्यू-9 रीपर जैसे यूएवी पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल बांग्लादेश अपने सैन्य उपकरणों का 70-80 प्रतिशत चीन पर निर्भर रहा है। इसके अलावा अमेरिका एक और सैन्य समझौते, एसीएसए पर भी बातचीत कर रहा है। यह रसद समर्थन (साजो-सामान से जुड़ी मदद) का समझौता है। इससे अमेरिकी युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को रखरखाव और ईंधन भरने के लिए बांग्लादेश के बंदरगाहों और हवाई क्षेत्रों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। इससे बंगाल की खाड़ी में आपदा के समय बेहतर संयुक्त कार्रवाई एवं समुद्री निगरानी में आसानी होगी।
ढाका में अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश ने फिर से कहा है कि वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है और द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक और अधिक समकालीन क्षेत्रों तक बढ़ाने में रुचि रखता है। पिछले सप्ताह बांग्लादेश को ‘पैक्स सिलिका’ आर्थिक सुरक्षा ढांचे में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था। इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और ज़रूरी खनिजों से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति चेन को चीन से दूर ले जाकर नए सिरे से तैयार करने के लिए बनाया गया है।
दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर ने हाल ही में ढाका की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री रहमान के साथ हुई एक बैठक में प्रस्ताव रखा कि बांग्लादेश अमेरिकी-नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में शामिल हो। गोर ने एक दिन पहले ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से भी मुलाकात की थी। भारत पहले से ही पैक्स सिलिका का पूर्ण सदस्य है।
यह एक ऐसा समझौता है जिसका उद्देश्य चीन से बचते हुए एक रणनीतिक आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना है। ढाका के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि यह पूरी तरह संभव है कि ढाका को ऐसा प्रस्ताव दिए जाने से पहले इस मुद्दे पर भारतीयों के साथ चर्चा की गई हो ताकि उसे बीजिंग के प्रभाव से दूर किया जा सके, जिसे लेकर दिल्ली और वाशिंगटन दोनों चिंतित हैं। उल्लेखनीय है कि पैक्स सिलिका कोई साधारण पारंपरिक मुक्त-व्यापार समझौता नहीं है बल्कि यह एक आर्थिक-सुरक्षा ढांचा है, जिसके अंतर्गत सहभागी देश अमेरिका, भारत, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया महत्वपूर्ण खनिजों और एआई की दुनिया में व्यापार एवं निवेश के लिए एक नई आपूर्ति श्रृंखला का सचेत रूप से निर्माण कर रहे हैं, जिसमें चीन की कोई भूमिका नहीं होगी।
प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
आरएसएसविज्ञापन र॓टहमार॓ साथ काम करेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT AutoHealthshotsHT SmartcastFAB Play

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News