4 अगस्त 2026 को भारतीय विमानन के इतिहास में एक और दहशत भरा पल दर्ज हुआ. एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 (फुकेट-दिल्ली) रास्ते में अचानक 300 फीट नीचे गिर गई. इस हादसे में 13 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स समेत कुल 17 लोग घायल हो गए. कुछ यात्रियों के सिर पर पट्टियां बंधी थीं और केबिन की ऊपरी छत टूटी हुई थी. यह घटना टर्बुलेंस के खतरे की एक और ताजा तस्वीर है. यह बीते कुछ सालों में बार-बार और ज्यादा तेज हो गया है. तो आखिर क्या है टर्बुलेंस, कब-कब आता है और सबसे खतरनाक कौन-सा है…
हवा में उड़ते हुए अचानक प्लेन में होने वाला टर्बुलेंस क्या है?
टर्बुलेंस को आप हवा में उठने वाली अदृश्य लहरें समझ सकते हैं. जब हवाई जहाज किसी ऐसी जगह से गुजरता है जहां हवा असमान और तेज बह रही हो, तो प्लेन हिलने लगता है. यह उसी तरह है जैसे सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त गड्ढ़े या उबड़-खाबड़ रास्ते पर झटके लगते हैं.
हवाई जहाज के आस-पास हवा कभी एक समान नहीं होती. जब हवा की गति या दिशा में अचानक बदलाव होता है, तो प्लेन को झटका लगता है. इसे ही टर्बुलेंस कहते हैं.
क्या एक ही तरह का टर्बुलेंस होता है या और भी?
टर्बुलेंस कुल मिलाकर 3 तरह के होते हैं:
1. बारिश और तूफान में कन्वेक्टिव टर्बुलेंस
जब कोई तेज बारिश, आंधी या तूफान आता है, तो उसके अंदर हवा बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती है. जब प्लेन ऐसे बादलों के पास से गुजरता है, तो जोरदार झटके लगते हैं. मानसून के मौसम में ऐसा ज्यादा होता है. AI2379 फ्लाइट भी मानसूनी हवाओं वाले इलाके से गुजरी थी.
2. पहाड़ों से गुजरने पर माउंटेन-वेव टर्बुलेंस
जब हवा पहाड़ों से टकराती है, तो वह ऊपर उठती है और लहरों की तरह हिलने लगती है. अगर प्लेन इन लहरों के बीच से गुजरता है, तो उसे झटके लग सकते हैं.
3. सबसे खतरनाक है क्लियर-एयर टर्बुलेंस
यह सबसे खतरनाक और सबसे अनदेखा टर्बुलेंस है. यह बिल्कुल साफ आसमान में बिना किसी बादल के आता है. इसे न तो आंखों से देखा जा सकता है और न ही रडार से पकड़ा जा सकता है.
यह हाई-स्पीड जेट स्ट्रीम (ऊंचाई पर बहने वाली बहुत तेज हवाएं) के कारण बनता है. जब तेज और धीमी हवा की परतें आपस में रगड़ खाती हैं, तो यह अशांति पैदा होती है. यही वजह है कि कभी-कभी बिल्कुल साफ मौसम में भी प्लेन अचानक जोर से हिलने लगता है.
सबसे बड़ा खतरा यह है कि क्लियर-एयर टर्बुलेंस का पता लगाना बहुत मुश्किल है. इस वजह से पायलटों को इसकी पहले से जानकारी नहीं होती और वे इससे बच नहीं सकते.
तो क्या टर्बुलेंस में भी अलग-अलग लेवल होती है?
टर्बुलेंस को तीन लेवल में बांटा जाता है:
गंभीर टर्बुलेंस में प्लेन को कोई खतरा नहीं होता, क्योंकि उसे बहुत मजबूत बनाया जाता है. असली खतरा यात्रियों को होता है. खासकर उन्हें जिन्होंने सीटबेल्ट नहीं लगाई होती.
क्या टर्बुलेंस का कोई खास वक्त तय होता है?
टर्बुलेंस हर मौसम में आ सकता है, लेकिन कुछ मौकों पर इसकी आशंका ज्यादा होती है:
टर्बुलेंस में क्या करें और क्या न करें?
यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है:
क्या करें:
क्या न करें:
दरअसल, ग्लोबल वार्मिंग की वजह से जेट स्ट्रीम (ऊंचाई पर बहने वाली हवाएं) और तेज हो रही हैं. इससे क्लियर-एयर टर्बुलेंस (CAT) बढ़ रहा है. यानी आने वाले सालों में उड़ानें और ज्यादा हिलेंगी और टर्बुलेंस के हादसे बढ़ सकते हैं.
अब तक सबसे खतरनाक टर्बुलेंस हादसा कौन-सा है?
अब तक का सबसे भीषण टर्बुलेंस हादसा 24 मई 2024 को सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट SQ321 के साथ हुआ. यह फ्लाइट लंदन से सिंगापुर जा रही थी. म्यांमार के ऊपर लगभग 11,000 मीटर की ऊंचाई पर उसे बेहद गंभीर क्लियर-एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था…
इस हादसे में 79 लोग घायल हुए थे. कुछ पैसेंजर्स की रीढ़ की हड्डी टूटी, किसी के दिमाग पर चोट आई तो किसी के कान के पर्टे फट गए. 7 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. 73 साल के एक ब्रिटिश यात्री का दिल का दौरा पड़ने से तमौत हो गई. यह आधुनिक इतिहास का सबसे भीषण टर्बुलेंस हादसा था.
ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.
We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.