बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा झटका लगा है. बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा में पार्टी के इकलौते प्रतिनिधि उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. उनके निधन के बाद अब उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का कोई विधायक नहीं बचा है. उमाशंकर सिंह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था. उमाशंकर सिंह के निधन की खबर मिलते ही बलिया समेत पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई. उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में दुख का माहौल है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है.
बलिया जिले के नगरा ब्लॉक के खनवर गांव के रहने वाले उमाशंकर सिंह ने वर्ष 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी मजबूत शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की और लगातार तीन बार विधायक बने. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक सीट मिली थी और यह सीट रसड़ा से उमाशंकर सिंह ने जीती थी. इसके बाद उन्हें बसपा विधायक दल का नेता बनाया गया था. उनके निधन के साथ ही विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म हो गया है.
उमाशंकर सिंह पूर्वांचल में बसपा के मजबूत नेताओं में गिने जाते थे. उन्होंने अपने क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के जरिए भी पहचान बनाई. गरीब परिवारों की बेटियों के लिए सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित कर उन्होंने लोगों के बीच अलग छवि बनाई थी. उन्होंने पहले 251 और बाद में 351 जोड़ों के सामूहिक विवाह का आयोजन कराया था. इसके अलावा शिक्षा, सामाजिक सहयोग और जनसेवा से जुड़े कई कार्यों में भी वह सक्रिय रहे.
अपने राजनीतिक सफर के दौरान उमाशंकर सिंह को एक बार लाभ के पद से जुड़े मामले में विधानसभा सदस्यता गंवानी पड़ी थी. हालांकि बाद में उनकी सदस्यता बहाल कर दी गई थी और उन्होंने फिर से राजनीतिक गतिविधियां जारी रखीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमाशंकर सिंह का निधन अत्यंत दुखद है. उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस कठिन समय में शक्ति देने की कामना की.
उमाशंकर सिंह के निधन को बसपा के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है. लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले उमाशंकर सिंह ने पूर्वांचल में पार्टी को मजबूत आधार देने में अहम भूमिका निभाई थी. उनके जाने से यूपी की राजनीति में बसपा की स्थिति और कमजोर हो गई है. (एजेंसी इनपुट्स)
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