Varanasi News: वाराणसी, विशेष संवाददाता। गंगा के जलस्तर में शनिवार से तेज बढ़ाव शुरू हो गया है। रविवार को जलस्तर में वृद्धि दर सात सेंमी प्रति घंटा थी। देर रात शीतला घाट के एकदम पास बाढ़ का प्रवाह हो रहा था। सोमवार सुबह तक गंगा के मां शीतला मंदिर की चौखट तक पहुंच जाने की संभावना है। गंगा में नौकाओं का संचालन बंद कराने के साथ प्रशासन ने वरुणा एवं असि किनारे के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन के कर्मचारी लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की हिदायत दे रहे हैं। उन्हें राहत शिविरों की जानकारी भी दी जा रही है। वहीं, केन्द्रीय जल आयोग का अनुमान है कि प्रयागराज और मिर्जापुर में भी गंगा के जलस्तर में 6 सेंमी प्रति घंटा से बढ़ाव को देखते हुए बनारस में अगले 48 घंटे तक बढ़ाव का ही ट्रेंड रहेगा। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक रात्रि आठ बजे गंगा का जलस्तर 65.30 मीटर पर था। चेतावनी बिंदु 70.262 और खतरे का निशान 71.262 मीटर पर है। रविवार को 12 घंटे में लगभग तीन फीट जलस्तर बढ़ा है।
गंगा के सभी घाट पहले ही बाढ़ की चपेट में हैं। हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट स्थित शवदाह स्थल भी अब जलमग्न हो चले हैं। मणिकर्णिका घाट पर अब छत पर शवदाह होने लगा है। गंगा में उफान को देखते हुए हरिश्चंद्र घाट पर सोमवार से गलियों में शवदाह होगा। गंगा के रौद्र रूप के चलते घाट किनारे के दुकानदारों, तीर्थपुरोहितों और नाविकों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। कई दुकानें और पूजा सामग्री की गुमटियां हटाई जा चुकी हैं। प्रशासन ने कांवरियों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा, सख्ती बढ़ा दी है। रविवार को घाटों पर उमड़े श्रद्धालुओं और कांवरियों से जलपुलिस एवं एनडीआरएफ के जवान गहरे पानी में न जाने की अपील कर रहे थे।
सुबह ए बनारस मंच के पास पहुंचा पानी
अस्सी, रीवा, रविदास आदि घाटों के किनारे के दुकानदारों ने अपनी गुमटियों और तीर्थपुरोहितों ने अपनी चौकियों को घाट के ऊपर कर दिया है। दस सीढ़ी पानी बढ़ने पर पानी सुबह-ए-बनारस के मंच के पास पहुंच जाएगा। तुलसी घाट से पनपावा घाट का संपर्क टूट जाएगा।
ढाब में सब्जियों की फसल खतरे में
चिरईगांव। गंगा में बढ़ाव से सोता के तलहटी में लगी फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। सोमवार तक सैकड़ों एकड़ जमीन में लगीं सब्जियों एवं चारे की फसलों तक पानी पहुंच जाने की संभावना है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरए चौधरी ने रविवार को ढाब क्षेत्र के पशुपालकों से विभागीय टीकाकरण अभियान की जानकारी ली।
डीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया कि पिछले 48 घंटे के अंदर गंगा में तेज वृद्धि शुरू हुई है। उत्तराखंड और मध्यप्रदेश में भारी बारिश के चलते गंगा औऱ यमुना में उफान आया है। इसे देखते हुए पुलिस, राजस्व विभाग और एनडीआरएफ को अलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ से बचाव व राहत कार्यों के लिए शहर से गांवों तक टीमें गठित कर दी गई हैं। स्थिति गंभीर होने पर कंट्रोल रूम खोला जाएगा। सिंचाई विभाग को जनपद के साथ ही प्रयागराज आदि ऊपरी इलाकों में भी जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ राहत की सभी तैयारी भी पूर्ण कर ली गई है। ग्रामीण इलाकों में एसडीएम और तहसीलदार को नजर रखने के लिए कहा गया है।
मणिकर्णिका घाट पर आठ चितास्थल जलमग्न
पीजी 16-17
हरिश्चंद्र घाट पर भी प्लेटफॉर्म डूबे
शवयात्रियों की परेशानियां बढ़ीं
वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ाव से श्मशान घाटों के कई चितास्थल डूब गए हैं। इससे शवदाह पर खासा असर पड़ा है। अपने परिजनों के अंतिम संस्कार करने पहुंच रहे लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
मणिकर्णिका घाट पर आठ चितास्थल डूब गए हैं। रविवार शाम महाश्मशाननाथ मंदिर के पास छह-सात चिताएं ही लग पा रही थीं। शवों को गंगाजल देने में भी परिजनों को मशक्कत करनी पड़ रही है। श्मशान घाट पर नीचे तीन से अधिक शवों को रखने की जगह नहीं बची है। यहां छत पर अधिक चिताएं सजाई जा रही हैं। विष्णुपद से महज तीन सीढ़ी दूर गंगा बह रही हैं। लगातार बढ़ाव होता रहा तो एक-दो दिन में नीचे शवदाह पूरी तरह बंद हो सकता है।
उधर, हरिश्चंद्र घाट पर भी प्लेटफॉर्म डूब गए हैं। अब सीढ़ियों पर शवदाह हो रहा है। पहले यहां एक साथ दस से अधिक शवदाह होते थे, अब तीन से चार ही हो पा रहे हैं। गंगा के जलस्तर में इसी तरह से बढ़ोतरी जारी रहने पर इस श्मशान घाट के ऊपर गलियों में अंतिम संस्कार कराना पड़ेगा।
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मौसम की अब वार्ड और पंचायत स्तर पर मिलेगी सटीक जानकारी
फोटो : रडार के नाम से
पिंडरा में 25 करोड़ का ‘डॉप्लर रडार’ लगा
अगले सप्ताह से चालू करने की तैयारी
बादलों के मूवमेंट के आधार पर होगा सही पूर्वानुमान
पूर्वानुमान अभी पटना-लखनऊ से जारी होता है
मोदस्सिर खान
वाराणसी। बनारस सहित सीमावर्ती जिलों में जल्द ही मौसम का सटीक पूर्वानुमान मिलेगा। इसके लिए पिंडरा में 25 करोड़ रुपये की लागत से हाइटेक डॉप्लर रडार लग गया है। उसे अगले सप्ताह चालू करने की तैयारी चल रही है। इसके चालू होने से सौ किलोमीटर के दायरे में मोसम से संबंधित गतिविधियों (बारिश, बिजली, आंधी आदि) की जानकारी समय से मिलेगी। साथ ही, बनारस जिले में एक किलोमीटर अंतराल पर यानी पंचायत और वार्ड स्तर पर मौसम में होने वाले बदलाव की भी जानकारी मिल सकेगी।
बनारस सहित आसपास के जिले में अभी लखनऊ और पटना के डॉप्लर रडार से मौसम का पूर्वानुमान जारी होता है। 250 से 300 किमी दूरी होने के कारण कई बार मौसम की सटीक भविष्वाणी नहीं मिल पाती है। इसे देखते पिंडरा में हाइटेक डॉप्लर रडार लगाया गया है। इस रडार से मौसम विभाग को यह जानकारी मिल जाएगी कि किस इलाके में बादल बन रहे हैं, वे कितनी ऊंचाई पर हैं, कितनी तेजी से चल रहे हैं और वे बारिश का रूप ले सकते हैं या नहीं। मौसम विभाग के पास हर मिनट अपडेट होने वाला डेटा होगा, जिससे चेतावनियां पहले से कहीं ज्यादा सटीक और समय पर दी जा सकेंगी।
मौसम कार्यालय, वाराणसी के प्रमुख एवं मौसम विज्ञानी मनीष राय ने कहा कि नए रडार की टेस्टिंग हो गई है। एक सप्ताह में इसे शुरू करने की तैयारी है। इसकी मदद से हम लोग वॉर्डवार और ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्वानुमान जारी कर सकेंगे।
डॉप्लर ऐसे करेगा काम
1. बादल-हवा की गति की पहचान : रडार हवा में माइक्रोवेव पल्स छोड़ता है। जब ये तरंगें बादलों में मौजूद बूंदों या ओलों से टकराकर लौटती हैं, तो उनकी फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) में बदलाव आता है। पास आती बूंदों की फ्रीक्वेंसी बढ़ती है और दूर जाती बूंदों की घटती है। इससे बादलों और हवा की गति और बवंडर के रोटेशन की सटीक जानकारी मिलती है।
2. दो तरह के संकेत : पारंपरिक रडार केवल क्षैतिज (होरिजेंटल) तरंगें भेजते हैं, जबकि ड्यूल-पोल रडार एक साथ क्षैतिज और लंबवत (वर्टिकल) दोनों सिग्नल भेजता है। इससे हवा में तैर रहे कणों के आकार, बनावट और झुकाव का पता चलता है।
3. सटीक वर्गीकरण : रडार आसानी से भेद कर लेता है कि बादल में पानी की बूंदें हैं या बर्फ के क्रिस्टल, ओला या सिर्फ धूल/कीड़े।
4. अति-स्थानीय और त्वरित चेतावनी : रडार का एक्स-बैंड छोटी तरंग दैर्ध्य (शॉट वेवलेंथ : 2.5 से 4 सेमी) पर काम करता है, जो 100 किमी के दायरे में बादलों के घनत्व, वर्षा की तात्कालिक तीव्रता और अचानक आने वाले थंडरस्टॉर्म को मिनट-दर-मिनट ट्रैक करने में सक्षम है।
(जैसा मौसम वैज्ञानिक मनीष राय ने बताया)
सटीक पूर्वानुमान : डॉप्लर रडार की मदद से बनारस सहित आस-पास के जिले में बारिश या तूफान की भविष्यवाणी घंटे या मिनट के हिसाब से की जा सकती है।
फसलों की सुरक्षा : किसानों को पहले से पता रहेगा कि कहां बारिश या ओले गिर सकते हैं, इससे वे अपनी फसल बचा सकेंगे।
विमानन और परिवहन में मदद : मौसम की निगरानी से हवाई अड्डों और हाइवे पर दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा।
रियल टाइम डेटा : हर मिनट अपडेट होता डेटा मौसम रिपोर्ट को भरोसेमंद बनाता है।
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बीएचयू मौसम कार्यालय के कर्मचारी शिफ्ट
वाराणसी, कार्यालय संवाददाता।
बीएचयू के मौसम कार्यालय में पिछले चार दिनों से मॉनिटरिंग बंद हो गई है। पिंडरा में नया रडार लगने के बाद यहां सिर्फ एक कर्मचारी को छोड़, बाकी सभी को बाबतपुर कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है। कार्यालय में मौसम वैज्ञानिक सहित सात कर्मचारी तैनात रहे हैं। इस कार्यालय को बंद करने की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अधिकारिक आदेश नहीं आया है। बीएचयू में 1960 से मौसम विभाग का कार्यालय है। यहां पर हर रोज तापमान और बारिश का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता रहा है।
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मौसम का मिजाज : आज और कल बारिश का ऑरेंज अलर्ट
मेघ गर्जन के साथ वज्रपात की भी संभावना
19 को भारी वर्षा का संकेत, 22 तक रहेंगे बादल
वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। सावनी बादलों का मूड रह-रह कर बदल जा रहा है। इस नाते पुरवा की उमस भरी चिपचिपी गर्मी वातावरण में हावी है। शनिवार की तरह रविवार को भी लगभग पूरे दिन उमस ने लोगों को असहज बनाए रखा। वहीं, मौसम विभाग ने सोमवार एवं मंगलवार को भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन दो दिनों में मेघ गर्जन के साथ आकाशीय बिजली भी गिर सकती है। 19 अगस्त को भी भारी वर्षा की संभावना है। मानसूनी बादल फिलहाल 22 अगस्त तक जमे रह सकते हैं।
रविवार सुबह तेज धूप निकली थी। दोपहर 11 बजे से 12 बजे के बीच शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के इलाकों में हल्की बारिश हुई जबकि बहुत से इलाकों में एक बूंद नहीं पड़ी। वैसे सूरज की तल्खी से लोगों को कुछ राहत मिली। इसके बाद देर शाम आठ बजे फुहारें पड़ीं, इससे उमस बढ़ गई। हालांकि मौसम से जुड़ी वेबसाइटों पर देर रात और भोर में तेज बारिश की संभावना जताई जा रही थी। रविवार को अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस रहा। पिछले 24 घंटों के दौरान 1.2 एमएम बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि बनारस सहित आसपास अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना है।
शॉर्ट बायो : अमरीष सिंह, पिछले 19 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में रिपोर्टिंग टीम को लीड कर रहे हैं। इन्होंने हिन्दुस्तान डिजिटल प्रोग्राम ‘दिनभर की पांच प्रमुख खबरें’ के लिए एंकरिंग भी कर चुके हैं।
परिचय एवं अनुभव
अमरीष सिंह हिन्दुस्तान समाचार पत्र के विशेष संवाददाता हैं। इन्हें पत्रकारिता में 19 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह रिपोर्टिंग टीम को लीड कर रहे हैं।
करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
अमरीष सिंह ने अपने करियर की शुरुआत समाचार एजेंसी यूनिवार्ता दिल्ली से की, यहां विभिन्न राजनीतिक दलों की रिपोर्टिंग की। वर्ष 2007 में प्रतिष्ठित समाचार पत्र अमर उजाला वाराणसी से जुड़े। यहां सम्पादकीय विभाग में बलिया, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर और पूर्वांचल डेस्क पर काम किया। वर्ष 2014 में वाराणसी हिन्दुस्तान ज्वाइन किए और 2019 से रिपोर्टिंग टीम को लीड कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग
बीएससी (बायोलॉजी) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट होने के कारण अमरीष सिंह को विज्ञान और पत्रकारिता का संयोजन मिला। नगर निगम, विकास प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम, सिंचाई विभाग जैसे दर्जनों बीट पर काम किया। वर्तमान में टीम को लीड करने के साथ ही काशी विश्वनाथ धाम, ज्ञानवापी, जिला प्रशासन, ग्रामीण विकास, भाजपा, वीआईपी मूवमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
विजन
अमरीष सिंह का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है। उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
विशेषज्ञता
विकासपरक खबरें, एक्सक्लूसिव रिपोर्टिंग।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों का विशेष कवरेज।
ज्ञानवापी मुकदमा और उससे जुड़े संदर्भों की जानकारी।
नदी, परिवहन और उससे सम्बंधित बीट पर भी पकड़।
डेस्क और कोआर्डिनेशन का भी अनुभव
रिसर्च और एक्सप्लेनर रिपोर्टिंग।
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