केरल के विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह (Vizhinjam International Seaport) ने केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की मौजूदगी में पूर्ण EXIM (आयात-निर्यात) परिचालन शुरू कर दिया है. अब तक यह बंदरगाह मुख्य रूप से केवल ट्रांसशिपमेंट (माल के फेरबदल) का केंद्र था. लेकिन इस नई शुरुआत के साथ अब यह भारत से सीधे सामान भेजने और बाहर से माल मंगाने का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन गया है.
इस ऐतिहासिक अवसर पर केरल के मुख्यमंत्री के अलावा उद्योग मंत्री पी.के. कुन्हालीकुट्टी, स्थानीय विधायक एम. विंसेंट और भारत सरकार के समुद्री प्रशासन के महानिदेशक (IAS) श्याम जगन्नाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधि मौजूद रहे.
मुख्यमंत्री बोले- बेहद गर्व का ये पल
इस उपलब्धि पर केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा, ‘यह हम सभी के लिए गर्व का पल है. विझिंजम अब भारत को दुनिया से जोड़ने वाला मुख्य द्वार बन चुका है. हमारा लक्ष्य ‘मिशन समुद्र’ के तहत इस बंदरगाह का अधिकतम लाभ उठाना है. इसके लिए रिंग रोड निर्माण हेतु 3,200 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे, सड़क-रेल संपर्क को और मजबूत किया जाएगा.’
इस मौके पर अडानी पोर्ट्स (APSEZ) के सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा, ‘विझिंजम केवल माल की आवाजाही का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और समुद्री व्यापार में नेतृत्व की आकांक्षाओं का प्रतीक है. यह केरल की प्रतिभा और भारतीय उद्यम को दुनिया के बाजारों से जोड़ता है.’
विझिंजम बंदरगाह की कई विशेषताएं हैं, यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से महज 10 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है. 18 से 20 मीटर की स्वाभाविक प्राकृतिक गहराई, जिसकी वजह से दुनिया के सबसे बड़े जहाजों (Ultra Large Container Vessels – ULCVs) का यहां रुकना आसान है.
अडानी समूह का बड़ा निवेश
विझिंजम परियोजना में दूसरे चरण के विस्तार के साथ अडानी समूह का कुल निवेश 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा. यह केरल में किसी भी व्यापारिक घराने द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा निवेश है. 3 दिसंबर 2024 को वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद से इस बंदरगाह ने 22.8 लाख से अधिक कंटेनर और 1,100 से अधिक जहाजों का संचालना किया है. इसने मात्र 10 महीनों में 10 लाख TEUs और 18 महीनों में 20 लाख TEUs का आंकड़ा पार कर लिया.
यहां भारत में आने वाला अब तक का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज ‘MSC Irina’ (399.99 मीटर लंबा और 24,346 TEU क्षमता वाला) भी सफलतापूर्वक रुका था.
विदेशी पोर्ट्स पर निर्भरता में कमी
फिलहाल में भारत का 75% से अधिक ट्रांसशिपमेंट कार्गो विदेशी बंदरगाहों के माध्यम से जाता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते हैं. विझिंजम में EXIM चालू होने से इस निर्भरता में भारी कमी आएगी. इस बंदरगाह का सीधा फायदा केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के मुख्य औद्योगिक व विनिर्माण केंद्रों जैसे बेंगलुरु, कोयंबटूर और तिरुपुर को मिलेगा.
इस परियोजना से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और फ्रेट फॉरवर्डिंग जैसे क्षेत्रों में 5,000 से अधिक नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे. दिसंबर 2028 तक पूरे होने वाले 16,000 करोड़ रुपये के दूसरे चरण के विस्तार के तहत बंदरगाह की वार्षिक क्षमता बढ़ाकर 57 लाख TEUs कर दी जाएगी. जिससे 1200 मीटर अतिरिक्त कंटेनर बर्थ, स्थायी रेल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स पार्क और आधुनिक वेयरहाउसिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
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