बिहार में मिले 10 लाख पांडुलिपियों में 1.58 करोड़ पन्ने होंगे डिजिटलाइज – Hindustan

भागलपुर, मुख्य संवाददाता। कला एवं संस्कृति विभाग ने केंद्र सरकार के फ्लैगशिप ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत राज्यभर से 10 लाख से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों के लगभग 1.58 करोड़ संवेदनशील पन्नों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। प्राचीन भारतीय साहित्य को भौतिक रूप से नष्ट होने और बौद्धिक चोरी से बचाने के लिए शुरू की गई इस राष्ट्रव्यापी मुहिम ने बिहार में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सूबे में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे में आठ लाख से अधिक पांडुलिपियां चिह्नित हुईं। भागलपुर में मिली पांडुलिपियां डिजिटलाइजेशन से अब सदियों तक सुरक्षित रहेंगी। पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए कला एवं संस्कृति विभाग ने 6.23 करोड़ के खर्च की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। ज्ञान भारतम मिशन के तहत सूबे की दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित रखी जा रहीं। बता दें कि देशभर में सबसे ज्यादा पांडुलिपियां बिहार में संग्रहित की गई हैं। राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे में जुटी टीम ने अब तक राज्य के विभिन्न पुस्तकालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मठों और निजी पारिवारिक संग्रहों से अब तक आठ लाख से अधिक विशिष्ट पांडुलिपियों की पहचान कर उनका डेटा दर्ज कर लिया है।
इस राष्ट्रव्यापी सर्वे के दौरान भागलपुर और उसके आसपास का अंग क्षेत्र एक बड़े खजाने के रूप में उभरकर सामने आया है। इतिहासकारों और संरक्षणविदों ने यहां ताड़पत्र, भोजपत्र और हाथ से बने कागजों पर लिखी गईं सदियों पुरानी हजारों पांडुलिपियां खोजी हैं। इन दुर्लभ कॉपियों के हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल दस्तावेज तैयार करके, भागलपुर में मिले ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स को दीमक, नमी और फटने के खतरों से हमेशा के लिए सुरक्षित किया जा रहा है।
भागलपुर में ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत चलाए गए सर्वेक्षण के दौरान कई प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां मिली हैं। इन स्थानों में चम्पापुर दिगम्बर जैन मंदिर, भगवान पुस्तकालय, शाह मार्केट स्थित पीर दमड़िया, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी और भागलपुर संग्रहालय शामिल हैं।
-अंकित रंजन, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी।
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