Haldwani News: जाम में समय के साथ बर्बाद हो रहा ईंधन – Hindustan

Haldwani News: हल्द्वानी, संवाददाता। हल्द्वानी में बेकाबू होती जाम की समस्या केवल मानसिक तनाव और समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर असर डाल रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों और मुख्य मार्गों पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों का समय तो खराब होता ही है, वहीं धीमी गति, बार-बार क्लिच-ब्रेक के इस्तेमाल और आइडलिंग (इंजन चालू रखकर खड़े रहना) की वजह से वाहनों का माइलेज गिर रहा है।

केस 1 (दफ्तर व व्यवसाय): सिंधी चौराहा, मंगल पड़ाव, रोडवेज बस अड्डे के पास सुबह-शाम लगने वाले जाम के कारण कई निजी व सरकारी कर्मचारी रोजाना दफ्तर देरी से पहुंच रहे हैं। नौकरीपेशा युवाओं का कहना है कि ऑफिस पहुंचने से पहले ही वे मानसिक रूप से थक जाते हैं।

केस 2 (स्कूली बच्चे और अभिभावक): स्कूल बसों और वैन के जाम में फंसने से छोटे बच्चों को भरी गर्मी और उमस में 20 से 35 मिनट तक वाहनों में कैद रहना पड़ रहा है। अभिभावकों को बच्चों को समय पर पहुंचाने के लिए सुबह आधा घंटा पहले निकलना पड़ रहा है।

केस 3 (एम्बुलेंस व आपात स्थिति): सुशीला तिवारी अस्पताल और बेस अस्पताल जाने वाली एम्बुलेंस अक्सर कालाढूंगी चौराहे या नैनीताल रोड पर रेंगती नजर आती हैं। सायरन बजने के बावजूद संकरी सड़कों, जाम और अव्यवस्थित पार्किंग के चलते वाहनों को रास्ता नहीं मिल पाता, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

तिकोनिया से मुखानी के छोटे से सफर में रोज आधा घंटा जाम में बीतता है। बार-बार क्लच-ब्रेक का प्रयोग होता है हर महीने 250 से 300 रुपये का अतिरिक्त पेट्रोल जल रहा है। गुस्सा और खीझ पैदा होती है।

– प्रभा माझिला, निवासी ऊंचापुल

काठगोदाम से तीनपानी आता हूं रोजाना जाम में फंस जाता हूं। हर महीने 500 रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त ईंधन खर्च हो रहा है। एक तो ई20 पेट्रोल पहले ही एवरेज कम दे रहा है ऊपर से जाम एक बड़ा सरदर्द बन चुका है।

– योगेंद्र सिंह, निवासी शीशमहल

जाम के डर से बच्चों को स्कूल के लिए आधा घंटा पहले तैयार करना पड़ता है। दोपहर में भीषण गर्मी के बीच बच्चे 30-35 मिनट तक स्कूल वैन में फंसे रहते हैं, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ती है।

– लता प्रिया, निवासी कुसुमखेड़ा

सिंधी चौराहे और मंगल पड़ाव पर सुबह-शाम का ट्रैफिक दफ्तर का समय बिगाड़ देता है। समय और पैसे की बर्बादी के साथ ऑफिस पहुंचने से पहले ही मानसिक तनाव हो जाता है।

– नितिन कुमार, निवासी रामपुर रोड

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