Feedback
महाराष्ट्र के मुंबई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मीरा भयंदर नगर निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या किसी विधायक का आदेश हाईकोर्ट से ऊपर है.
कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर हैरानी भी जताई. मामला BJP विधायक नरेंद्र मेहता के एक पत्र से जुड़ा है.
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र वी ग्हुगे और जस्टिस गौतम ए अंखड की बेंच ने की. बेंच ने मीरा भयंदर नगर निगम के कमिश्नर और टाउन प्लानिंग अधिकारी के काम पर सवाल उठाए. दरअसल, अधिकारियों ने एक डेवलपर के प्रोजेक्ट पर कई बार स्टॉप वर्क नोटिस जारी किए थे.
कोर्ट के आदेश के बावजूद जारी हुए नोटिस
मामला ग्रैंडबिल्ड लैंड डेवलपर्स LLP से जुड़ा है. दरअसल, कंपनी भयंदर में 33 मंजिला रिहायशी प्रोजेक्ट बना रही है. इसके साथ एक प्राइमरी स्कूल भी बनाया जाना है.
नगर निगम ने कंपनी को स्टॉप वर्क नोटिस जारी किए थे. इसके बाद डेवलपर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 27 अप्रैल को हाईकोर्ट की एक बेंच ने निगम की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने साफ कहा था कि कंपनी के खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाए.
इसके बावजूद निगम ने मई और जून में फिर स्टॉप वर्क नोटिस जारी कर दिए. इन नोटिस के पीछे BJP विधायक नरेंद्र मेहता के पत्र का हवाला दिया गया. विधायक ने प्रोजेक्ट के प्लान में बदलाव की मांग की थी.
यह भी पढ़ें: ‘रातोरात बिक्री बंद करने से होगा नुकसान’, FSSAI के नियमों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची Old Monk
कोर्ट ने पूछा-MLA हाईकोर्ट से ऊपर है क्या?
मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने अधिकारियों से कड़ा सवाल किया. कोर्ट ने पूछा कि क्या उनके लिए विधायक हाईकोर्ट से ऊपर है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि हाईकोर्ट की बेंच के आदेश की अनदेखी करके विधायक के पत्र पर कार्रवाई क्यों की गई.
बेंच ने अधिकारियों के व्यवहार पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि उनके इस रवैये से वह हैरान है. शुरुआत में कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी भी दी. बेंच ने पुराने एक मामले का उदाहरण दिया. इसमें कर्नाटक के मुख्य सचिव को अवमानना के मामले में जेल भेजा गया था.
यह भी पढ़ें: दो एग्जाम, जमकर घमासान… UGC-NET परीक्षा रद्द, बॉम्बे हाईकोर्ट एग्जाम में गड़बड़ी, दिपके की भी एंट्री
नगर निगम कमिश्नर ने मांगी माफी
हालांकि बाद में कोर्ट ने फिलहाल कड़ी अवमानना कार्रवाई नहीं की. निगम कमिश्नर शर्मा ने कोर्ट में माफी मांगी. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी.
डेवलपर की ओर से वरिष्ठ वकील बीरेंद्र सराफ ने भी कोर्ट से साधारण शो-कॉज नोटिस जारी करने का अनुरोध किया. उन्होंने कमिश्नर की माफी को देखते हुए यह मांग की. कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया.
बेंच ने फिलहाल अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कमिश्नर शर्मा को माफी का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी.
यह भी पढ़ें: ‘2030 से पहले रिहाई संभव नहीं…’ बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम की अर्जी
MahaRERA ने भी प्रोजेक्ट पर रोक लगाई
निगम की कार्रवाई का असर प्रोजेक्ट पर भी पड़ा. स्टॉप वर्क नोटिस के बाद MahaRERA ने 21 जुलाई को प्रोजेक्ट के खाते फ्रीज कर दिए. साथ ही बिक्री के रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगा दी गई.
अब हाईकोर्ट की फटकार के बाद निगम ने सभी स्टॉप वर्क से जुड़े पत्र वापस लेने का भरोसा दिया है. निगम इन्हें MahaRERA को भी भेजेगा.
कोर्ट ने अधिकारियों से अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है. अब मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी. तब तक निगम को अपनी कार्रवाई और माफी से जुड़े दस्तावेज कोर्ट में पेश करने होंगे.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू