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क्या आपने ध्यान दिया है कि जो आपसे धीमी गाड़ी चलाता है वह मूर्ख लगता है और जो आपसे तेज चलाता है वह पागल
सड़क पर वाहन चला रहे लोगों में आजकल एक अजीब सी बेचैनी देखने को मिलती है. अपने अगल-बगल चल रहे सारे वाहन चालकों को आदमी मूर्ख समझने लगा है. अपने ड्राइविंग स्किल पर वो खूब इतराता है. लेकिन दूसरे वाहन चालकों को गधा-घोड़ा हांकने वाला समझता है. दूसरों के ड्राइविंग स्किल में कमी खोजने वाला शख्स असल में अपने कभी संतुष्ट न होने वाले मिजाज से परेशान है. हमेशा असंतुष्ट रहने की यह प्रवृत्ति ही व्यक्ति को दूसरों में कमी खंगालने पर मजबूर करती है.
अमेरिका के मशहूर कॉमेडियन जॉर्ज कार्लिन का एक प्रसिद्ध विचार इस तरह के मानवीय व्यवहार पर गजब का व्यंग्य करता है. इसका भाव कुछ ऐसा है कि सड़क पर कार चलाने वाले ड्राइवर परेशान हैं. इसकी वजह यह है कि जो उनसे धीमी गाड़ी चले रहे हैं वो उन्हें मूर्ख लगते हैं और जो उनसे तेज गाड़ी चला रहे हैं, वो उन्हें पागल लगते हैं.
इस व्यक्ति की नजर में धीमी रफ्तार वाले चालक मंदबुद्धि और डरपोक हैं. जबकि तेज रफ्तार वाले चालक लापरवाह और खतरनाक. ऐसे ड्राइवर को लगता है कि पूरी दुनिया में सिर्फ उसकी रफ्तार ही सही है.
मशहूर कॉमेडियन के इस विचार का असली भाव सिर्फ गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं है. यह हमारे निजी जीवन और दूसरों को आंकने की बुरी आदत पर भी निशाना साधता है. हम अक्सर अपने जीवन की गति को ही बेहतर मान लेते हैं. जो व्यक्ति हमसे पीछे चल रहा होता है, हमारी नजर में वो कमजोर, नाकाम और आलसी बन जाता है. वहीं, जो लोग हमसे आगे निकल रहे होते हैं, वो हमें जल्दबाजी और गलत तरीके से आगे बढ़ने वाले दिखाई देते हैं.
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