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उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में स्थित मलिहाबाद (Malihabad) एक ऐसा कस्बा है, जिसकी पहचान यहां के मशहूर दशहरी आम से जुड़ी हुई है. मलिहाबाद नगर पंचायत होने के साथ-साथ तहसील और सामुदायिक विकास खंड का मुख्यालय भी है. यहां की मिट्टी, मौसम और बागवानी की परंपरा ने इसे देश के प्रमुख आम उत्पादक इलाकों में शामिल किया है.
मलिहाबाद उत्तर प्रदेश के 14 प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में सबसे बड़ा माना जाता है. यहां सैकड़ों किस्मों के आम उगाए जाते हैं, जिनमें दशहरी, चौसा, लंगड़ा और सफेदा प्रमुख हैं. खास तौर पर दशहरी आम ने मलिहाबाद को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहचान दिलाई है. यहां के आम की मांग अलग-अलग राज्यों के साथ दूसरे देशों में भी रहती है. आम की खेती यहां सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और स्थानीय संस्कृति का अहम हिस्सा है.
मलिहाबाद की आम की पहचान को आगे बढ़ाने में पद्मश्री से सम्मानित आम उत्पादक हाजी कलीम उल्लाह खान का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्होंने आम की अलग-अलग किस्मों को विकसित करने और मलिहाबाद की बागवानी को लोकप्रिय बनाने के लिए लंबे समय तक काम किया. उनके प्रयासों ने इस इलाके की आम की खेती को नई पहचान दिलाई.
मलिहाबाद की पहचान सिर्फ आम तक सीमित नहीं है. यह इलाका चिकनकारी कढ़ाई के काम के लिए भी जाना जाता है. यहां पारंपरिक चिकनकारी से जुड़े कारीगर और कामगार लंबे समय से इस हुनर को आगे बढ़ा रहे हैं.
इतिहास की बात करें तो मलिहाबाद का उल्लेख मुगल काल के दौरान भी मिलता है. इसे ऐतिहासिक रूप से एक परगने के मुख्यालय के रूप में जाना जाता था. शाहजहां के समय यहां अम्मानजई पठानों का बसना शुरू हुआ और वे इलाके के प्रमुख जमींदारों में शामिल हो गए. बाद में अवध के नवाबी दौर में भी मलिहाबाद का महत्व बना रहा.
मलिहाबाद की आम की परंपरा के इतिहास में नवाब फकीर मुहम्मद खान गोया का नाम भी जुड़ा है. बताया जाता है कि उन्होंने मलिहाबाद में आम के बाग लगाने की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद यहां बड़े स्तर पर आम की खेती की शुरुआत हुई. धीरे-धीरे यह इलाका आम के बागों से भरता गया और दशहरी इसकी सबसे बड़ी पहचान बन गया.
आज मलिहाबाद में मिर्जागंज, सैयदवाड़ा, चौधराना और केवलहार जैसे प्रमुख इलाके हैं. तहसील क्षेत्र में बड़ी संख्या में गांव और ग्राम पंचायतें शामिल हैं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती और खास तौर पर आम की बागवानी की बड़ी भूमिका है.
मलिहाबाद लखनऊ जिले का ऐसा क्षेत्र है, जहां इतिहास, खेती, कारोबार और पारंपरिक हुनर एक साथ दिखाई देते हैं. दशहरी आम की मिठास ने इसे उत्तर प्रदेश के नक्शे पर एक अलग पहचान दी है और मलिहाबाद की यही खासियत आज भी देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है.
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