एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा देश का कितने प्रतिशत गन्ना? जानें डिटेल – ABP News

भारत सरकार के एथोनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में मिलाने के लिए देश के कुल चीनी या गन्ना उत्पादन का लगभग 9 से 10 प्रतिशत हिस्सा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय किया है. इस लक्ष्य को पूरा करने में गन्ने की फसल एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है.
चूंकि हाल ही में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर एथेनॉल नीति पर भी चर्चा हो रही है, इसलिए देश के आम नागरिक और खास तौर पर किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके गन्ने का कितना हिस्सा ईंधन में बदल रहा है. 
सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2022-23 में एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा करीब 12 प्रतिशत था. वहीं मौजूदा सीजन 2025-26 में यह हिस्सा घटकर करीब 9 प्रतिशत रह गया है. इसका मतलब है कि पहले के मुकाबले अब कम गन्ना और चीनी एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रही है, फिर भी यह आंकड़ा काफी बड़ा माना जाता है.
एथेनॉल बनाने के लिए मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे और चीनी युक्त सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. आमतौर पर एक टन गन्ने से करीब 70 से 85 लीटर तक एथेनॉल तैयार किया जा सकता है. सरकार की नीति के तहत चीनी मिलों को सीधे गन्ने के रस से या फिर बचे हुए शीरे से एथेनॉल बनाने की छूट दी गई है, ताकि किसानों को समय पर भुगतान मिल सके और चीनी उद्योग को आर्थिक मजबूती मिले.
अगर उत्पादन के गणित को समझें तो 1 क्विंटल गन्ने से चीनी और एथेनॉल बनाने की क्षमता अलग-अलग होती है. यदि मिलें सीधे गन्ने के रस का इस्तेमाल करती हैं तो 1 क्विंटल गन्ने से लगभग 7 से 8.4 लीटर शुद्ध एथेनॉल तैयार होता है. इसके अलावा यदि गन्ने से पहले चीनी बनाई जाए और उसके बाद बचे हैवी शीरे का उपयोग किया जाए तो 1 क्विंटल गन्ने से लगभग 2.2 से 2.5 लीटर एथेनॉल निकाला जाता. 
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गन्ने और चीनी के एथेनॉल में इस्तेमाल होने की वजह से चीनी की कीमतों पर भी असर पड़ने की चर्चा होती रहती है. हालांकि सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी की मुख्य वजह एथेनॉल के लिए इस्तेमाल हो रही चीनी नहीं, बल्कि गन्ने की फसल में बीमारी और कम बारिश जैसी वजहों से उत्पादन में आई कमी है. मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान भी घटाकर करीब 306 लाख टन कर दिया गया है. 
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मंदसौर, मध्यप्रदेश के दीनदयाल पाटीदार ABP न्यूज में बतौर इंटर्न कार्यरत हैं. मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे दीनदयाल की जनरल नॉलेज (GK) और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है. वह खबरों को सटीक और ज्ञानवर्धक तरीके से पेश करने का हुनर रखते हैं.
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