नेपाल में अचानक कैसे आ गई इतनी भीषण बाढ़? सामने आ गई असली वजह – Hindustan

नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने भीषण तबाही मचा दी। इस बाढ़ में अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि किस तरह इस बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि एक के बाद एक गांव इसमें डूबते चले गए। लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। ऐसे में अब सवाल उठा रहे हैं कि अगर बारिश या भूकंप वजह नहीं है, तो फिर नेपाल में अचानक इतना बड़ा जलप्रलय कैसे आ गया? इसका जवाब अब सामने आ गया है।
भूवैज्ञानिकों और ग्लेशियोलॉजिस्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक बुधवार को काठमांडू के पास एक ग्लेशियर से बर्फ का बहुत ही विशालकाय टुकड़ा अचानक टूटकर गिर गया और यही बाढ़ की असली वजह है। वैज्ञानिकों की भाषा में इस घटना को ‘आइस एवलांच’ यानी बर्फ का भूस्खलन कहा जाता है।
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी के भूवैज्ञानिक डैनियल शुगर ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर इस घटना का विश्लेषण किया है। उन्होंने बताया, “ऐसा लगता है कि इलाके में मौजूद ग्लेशियर का एक हिस्सा पूरी तरह से अलग होकर सीधे 4,000 फीट नीचे घाटी में आ गिरा।” डैनियल शुगर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि सैटेलाइट इमेज देखकर ऐसा लगता है जैसे घाटी के निचले हिस्से में कोई बम धमाका हुआ हो। वहां सिर्फ टूटे हुए ग्लेशियर के अवशेष जमा दिख रहे हैं।
वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार लगभग 2,000 फीट चौड़ा बर्फ का विशाल टुकड़ा ग्लेशियर से कटकर अलग हो गया। यह टुकड़ा करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित था, और अचानक लगभग 4,000 फीट नीचे आ गिरा। स्कॉटलैंड की डंडी यूनिवर्सिटी के ग्लेशियोलॉजिस्ट साइमन कुक ने बताया कि इतनी ऊंचाई पर मौजूद बर्फ में भारी मात्रा में ऊर्जा होती है। जब यह इतनी भयानक ऊंचाई से नीचे गिरती है, तो गिरने की ताकत इतनी होती है कि बर्फ को पीस देती है और वह तेजी से बहने वाले पानी और मलबे के मिश्रण में बदल जाती है।
वैज्ञानिकों की टीम के अनुसार, ग्लेशियर के टूटने की यह घटना नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग 40 मील उत्तर में हुई। इसके बाद बर्फ और पानी का यह खतरनाक बहाव उत्तर-पश्चिम दिशा में घाटी के साथ बहते हुए भोटे कोशी नदी की ओर बढ़ा, जो नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित है। डॉ. साइमन कुक ने बताया कि नेपाल की यह घटना साल 2021 में भारत में हुई त्रासदी की याद दिलाती है। उस समय उत्तराखंड में भी हिमालय का एक ग्लेशियर टूट गया था, जिससे आई भीषण बाढ़ में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
इससे पहले शुरुआत में यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इस इलाके में 4.4 तीव्रता के भूकंप का डेटा दर्ज किया था। हालांकि, बाद में एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह कोई प्राकृतिक भूकंप नहीं था, बल्कि लैंडस्लाइड की प्रचंड ताकत की वजह से सिस्मिक सिग्नल पैदा हुए थे। USGS की वेबसाइट के मुताबिक, इस भूस्खलन के प्रभाव की तीव्रता 5.2 मैग्नीट्यूड के बराबर दर्ज की गई।
फ्रांस की यूनिवर्सिटी ग्रेनोबल एल्प्स की भू-आकृति वैज्ञानिक क्रिस्टन कुक ने बताया कि स्थानीय सिस्मिक रीडर्स में स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 8:40 बजे एक विशाल चीज के अचानक नीचे की ओर खिसकने का बड़ा सिग्नल मिला, जिसके तुरंत बाद पानी और मलबे के तेज बहाव के संकेत दर्ज किए गए।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान इस ग्लेशियर के ढहने की वजह हो सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि घटना से एक दिन पहले इलाके में बर्फ का कवर तेजी से गायब हुआ था यह इस बात का संकेत है कि बढ़ते तापमान ने बर्फ को पिघलाया और इस एवलांच को बढ़ावा दिया। हालांकि, वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि बादलों के कारण अभी पूरी सैटेलाइट तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं। आने वाले दिनों में जब तस्वीरें साफ होंगी, तब बाढ़ के सटीक कारणों का और स्पष्ट पता चल सकेगा। डैनियल शुगर ने कहा कि वीडियो में पानी की जितनी मात्रा दिख रही है, वह हालिया ग्लेशियर आपदाओं से कहीं ज्यादा है, इसलिए इस तबाही के पीछे किसी अन्य वजह से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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