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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की आपदा में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं. इस मुश्किल घड़ी में भारत और चीन दोनों देश नेपाल की मदद के लिए आगे आए हैं. भारत पहले ही अपनी टीम भेज चुका है, वहीं चीन से भी सुरंग बचाव में माहिर विशेषज्ञों की टीम जल्द नेपाल पहुंचने वाली है. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को इस बारे में पूरी जानकारी दी और साथ ही उन खबरों को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि नेपाल ने विदेशी मदद ठुकरा दी है.
दरअसल पिछले बुधवार को नेपाल तिब्बत सीमा के पास एक बड़ा हिमखंड टूटकर गिरा, जिससे ग्लेशियर टूटने की घटना हुई. इसके बाद पानी, मिट्टी और मलबे का सैलाब पूरे मध्य नेपाल में तबाही मचाते हुए बहा. इस सैलाब ने कई शहर और गांव बर्बाद कर दिए, घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए, और कई बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा.
नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक आठ जिलों से 669 शव बरामद हो चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा 248 शव चितवन से, 158 नवलपरासी पूर्व से, 75 नवलपरासी पश्चिम से और 54 गोरखा से मिले हैं. इसके अलावा धादिंग से 49, नुवाकोट से 41, तनहूं से 31 और रसुवा जिले से 13 शव निकाले गए हैं. राहत और बचाव दल अभी भी 2400 से ज्यादा लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं.
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विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि भारत, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई दोस्त देशों से लगातार मदद मिल रही है. उन्होंने बताया कि भारत से अब तक 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री मिल चुकी है, और शनिवार को चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया से भी जरूरी सामान पहुंचना शुरू हो गया है. मंत्री खनाल ने साफ कहा कि सिर्फ बचाव कार्य के लिए ही नहीं बल्कि पुनर्निर्माण के लिए भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है, क्योंकि तबाही का पैमाना बहुत बड़ा है.
#WATCH | Kathmandu: On the flash floods in Nepal, Minister of Foreign Affairs of Nepal Shisir Khanal says, “… I have personally spoken with counterparts, His Excellency Jaishankar, yesterday. Prime Minister Modi spoke with our Prime Minister Wright on the first day as well…… pic.twitter.com/c4VlwLZ2bF
मंत्री ने यह भी बताया कि जिस इलाके में बचाव कार्य चल रहा है वहां का भूगोल बेहद कठिन और जटिल है, इसलिए सरकार ने हवाई मार्ग की बजाय जमीनी रास्ते से मिलने वाली मदद को प्राथमिकता दी है. उनका कहना था कि अनजान इलाके में विदेशी टीमों को भेजने से तालमेल में दिक्कत आ सकती थी और खतरा भी बढ़ सकता था, इसलिए पहले नेपाल ने अपनी ही क्षमता के दम पर काम किया.
अब जरूरत के हिसाब से खास मदद ली जा रही है, जिसके तहत भारत से 11 सदस्यों की टीम पहुंच चुकी है, जिसमें डॉक्टर और सुरंग बचाव के विशेषज्ञ शामिल हैं. वहीं चीन से भी शिन्हुआ के मुताबिक नेपाल के अनुरोध पर सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम भेजी जा रही है.
इस बीच नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने भी भारत की तारीफ की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेहद उदार बताया. उन्होंने कहा कि भारत ने पुनर्निर्माण में भी बड़ी मदद देने का भरोसा दिया है. राहत कार्यों में अब तक करीब 2500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. बचाव अभियान में 11 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी लगे हैं, जिनमें 5 हजार से ज्यादा नेपाली सेना के जवान शामिल हैं.
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