नाइजर में फिर तख्तापलट की कोशिश! एयरपोर्ट और राष्ट्रपति भवन के पास फायरिंग – Aaj Tak News

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नाइजर की राजधानी नियामे में शनिवार को एक अहम सैन्य ठिकाने पर सैनिकों के अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह की घटना सामने आई. अधिकारियों के मुताबिक, सैनिकों के एक समूह ने सैन्य अड्डे पर अपने अधिकारियों के खिलाफ बगावत की और राजधानी में संवेदनशील जगहों पर गोलीबारी की. इस दौरान गोलियों और धमाकों की आवाजें सुनाई दीं.
शनिवार की सुबह तक शहर में लगातार गोलीबारी और धमाकों की आवाजें आती रहीं. इनमें मुख्य एयरपोर्ट भी शामिल था, जहां सैन्य एयर बेस Base 101 स्थित है. इसके अलावा राष्ट्रपति भवन और प्रमुख संस्थानों वाले  प्रशासनिक इलाके में भी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं.
नाइजर में 2023 में तख्तापलट के जरिए सत्ता संभालने वाली सैन्य सरकार के लिए यह एक और चुनौती है. सैन्य सरकार के प्रमुख अब्दुर्रहमान त्चियानी के नेतृत्व में देश ने लंबे समय से चले आ रहे पश्चिमी सुरक्षा सहयोगियों से संबंध तोड़कर रूस का रुख किया है. हालांकि, इसके बावजूद देश को जिहादी विद्रोहियों के हमलों और सहायता में कटौती के बाद बढ़ती आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
स्थिति पर काबू 
नाइजर के रक्षा मंत्री जनरल सलीफू मोडी ने कहा कि कुछ सैनिकों ने अड्डे पर कुछ अधिकारियों को बंधक बना लिया और संवेदनशील स्थानों पर गोलीबारी की. उन्होंने इसे अनुशासन और सैन्य नियमों से अलग हटने की घटना बताया. अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति पर फिर से नियंत्रण पा लिया गया है. इस साल यह तीसरी बार है जब डिओरी हामानी इंटरनेशनल एयरपोर्ट स्थित इस सैन्य अड्डे पर हमला हुआ है. इससे पहले दो बार जिहादी विद्रोहियों ने हमला किया था.
सुरक्षा बलों को एयरपोर्ट इलाके में तैनात किया गया, जबकि नियामे जाने वाली एक प्रमुख सड़क को बंद कर दिया गया.  RTN ने शनिवार सुबह कुछ घंटों के लिए अपना लाइव प्रसारण रोक दिया था, लेकिन बाद में प्रसारण फिर शुरू कर दिया. सत्ता में मौजूद सैन्य परिषद ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की. स्थानीय सांसद बाना वगाना इब्राहिम ने घटना को “कायराना हमला” बताया और कहा कि स्थिति नियंत्रण में है.
सरकार पर बढ़ा दबाव
यह एयरपोर्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. यहां नाइजर की वायुसेना का बेस और नाइजर-बुर्किना फासो-माली की संयुक्त सैन्य ताकत का मुख्यालय भी है. ताजा घटना ने सैन्य सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है, जो जिहादी हिंसा पर काबू पाने के लिए संघर्ष कर रही है. इस हिंसा से साहेल क्षेत्र के कई हिस्से प्रभावित हैं, जिनमें नाइजर के पड़ोसी बुर्किना फासो और माली भी शामिल हैं, जहां सैन्य सरकारें सत्ता में हैं.
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