Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच भारतीय मूल के एक अमेरिकी कपल की जिंदगी बचने की कहानी किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं है. तिब्बत की पहली धार्मिक यात्रा पर निकले अंजना राजा और पट्टाभिरामन वेंकटेशन नेपाल के रसुवा जिले से गुजर रहे थे, तभी अचानक पहाड़ से पानी और मलबे का सैलाब नीचे आ गया.
दोनों सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में रहते हैं और एक टूर बस से यात्रा कर रहे थे. बस जैसे ही चीन सीमा के पास स्थित तिमुरे इलाके में पहुंची, माहौल अचानक बदल गया. कुछ पल पहले तक यात्रियों के बीच सामान्य माहौल था, लेकिन देखते ही देखते पहाड़ से करीब 60-70 फीट ऊंची भूरे रंग की पानी और मलबे की लहर उनकी तरफ बढ़ती नजर आई.
अंजना राजा ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में बताया कि उस वक्त उन्हें लगा कि अब उनकी मौत निश्चित है. वहीं पट्टाभिरामन को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि सामने क्या आ रहा है. उन्हें लगा कि शायद जंगल में आग लगी है या फिर भूस्खलन अथवा भूकंप आया है.
स्थिति की गंभीरता तब साफ हुई जब बस के ड्राइवर, कंडक्टर और दो अन्य कर्मचारी वाहन के आगे से गायब दिखाई दिए. वे लोग पहले ही बस छोड़कर भाग चुके थे. इसके बाद अंजना ने भी बिना देर किए अपने पार्टनर को पकड़ा और उन्हें बस से बाहर निकलने के लिए कहा. दोनों ने वाहन से छलांग लगाई और पहाड़ी की तरफ दौड़ पड़े. उनके पीछे पानी और मलबे का विशाल सैलाब तेजी से आगे बढ़ रहा था. रास्ते में उन्हें कई घर टूटते दिखाई दिए. आसपास चीख-पुकार मची थी और लोग बाढ़ के पानी में बह रहे थे.
भागते हुए दोनों एक पुलिस बेस कैंप तक पहुंचे, लेकिन कुछ ही देर में वह जगह भी बाढ़ की चपेट में आ गई. अंजना के मुताबिक, पुलिस पोस्ट और वहां मौजूद लोग उनकी आंखों के सामने पानी में बह गए. अब उनके पास सिर्फ एक ही विकल्प था – जितनी जल्दी हो सके, और ऊंचाई पर पहुंचना. एक स्थानीय गाइड की मदद से दोनों ने पहाड़ की तरफ चढ़ना शुरू किया. रास्ता बेहद संकरा और फिसलन भरा था. वहां कीचड़, पत्थर और चट्टानें थीं, लेकिन पीछे मौत का खतरा उन्हें लगातार आगे बढ़ा रहा था.
दोनों ने देखते ही देखते करीब 500 सीढ़ियां चढ़ डालीं और पहाड़ के ऊपरी हिस्से में सुरक्षित जगह तक पहुंच गए. अंजना ने बताया कि उस वक्त उन्हें खुद नहीं पता कि इतनी तेजी से उन्होंने यह चढ़ाई कैसे पूरी की. इस पूरे संघर्ष के दौरान अंजना ने अपने पार्टनर का हाथ नहीं छोड़ा. उनका कहना था कि उस वक्त उनकी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि वे दोनों साथ रहें और वह उन्हें अपनी जिंदगी में बनाए रखना चाहती थीं.
ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. कपल ने स्थानीय लोगों और दूसरे पर्यटकों के साथ रात एक बकरी के शेड में बिताई. अगले दिन उन्हें एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया. पट्टाभिरामन के लिए यह अनुभव किसी चमत्कार से कम नहीं था. उन्होंने अपनी जिंदगी बचने को “चमत्कार” बताया. खास बात यह रही कि उनकी टूर बस में सवार सभी लोग इस हादसे में बच गए.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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