शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने के बीच सोमवार को गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई। फाफामऊ और छतनाग में गंगा तथा नैनी में यमुना का जलस्तर अब भी बढ़ रहा है, लेकिन सुबह की तुलना में रात में धीमी रफ्तार को देखते हुए मंगलवार सुबह तक राहत की उम्मीद बढ़ी है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए देर रात या सुबह तक गंगा-यमुना का जलस्तर स्थिर हो जाएगा। सोमवार सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर करीब साढ़े चार सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। दोपहर तक इसकी गति घटकर लगभग डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटे रह गई। सुबह उम्मीद जताई जा रही थी कि फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 83 मीटर से अधिक हो सकता है, जबकि नैनी में यमुना भी 83 मीटर के करीब पहुंचने की आशंका थी। दोपहर 12 बजे से साकारात्मक संकेत मिलना शुरू हो गया। रात आठ बजे फाफामऊ में गंगा और नैनी में यमुना का जलस्तर क्रमश: 2.5 मिमी प्रति घंटा बढ़ रहा था。
उधर, यमुनापार के ग्रामीण इलाकों में हालात विगाड़ने वाली टोंस खतरे के निशान से नीचे है, इसलिए इसके किनारे रहने वालों को अलर्ट रहने का आह्वान किया गया है। बेलन में पानी कम होने लगा है। हालांकि लपरी और बेलन नदियां भी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए परेशानी बनी हुई हैं। सिंचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड) के अधिशासी अभियंता दिग्विजय नारायण शुक्ला ने बताया कि कानपुर बैराज से गंगा में पानी का डिस्चार्ज पिछले दिनों की तुलना में कम हुआ है। यमुना की सभी सहायक नदियों का पानी कम हुआ। चिल्ला में चंबल का पानी थोड़ा बढ़ा है, लेकिन प्रयागराज में इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि गंगा-यमुना के प्रवाह क्षेत्र में बारिश नहीं होती है तो राहत मिल सकती है।
गंगा-यमुना का जलस्तर (रात आठ बजे)
गंगा फाफामऊ 82.76 मीटर
गंगा छतनाग 82.00 मीटर
यमुना नैनी 82.39 मीटर
खतरे का निशाना 84.73
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