भास्कर न्यूज | लुधियाना
नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच अपनी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जोन-सी के अधीन पिप्पल वाला चौक से ईस्टमैन चौक की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर करीब 5 एकड़ में काटी जा रही अवैध कॉलोनी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। बुधवार दोपहर डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर ने मौके पर पहुंचकर न केवल स्थिति का जायजा लिया, बल्कि वहीं से सोशल मीडिया पर लाइव होकर सीधे निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकार को फोन लगा दिया। कमिश्नर ने तुरंत जॉइंट कमिश्नर तपन भनोट और एमटीपी विजय कुमार को कॉन्फ्रेंस लाइन पर लिया।
जब डिप्टी मेयर ने 5 एकड़ में चल रहे अवैध निर्माण पर जवाब मांगा, तो दोनों आला अधिकारी अनभिज्ञता जताते नजर आए। कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने एमटीपी को तुरंत मौके पर पहुंचकर नियमानुसार डिमोलिशन की कार्रवाई करने और रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए थे। हालांकि, कमिश्नर के आदेशों के बावजूद देर शाम तक मौके पर नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
वीरवार को मैं दोबारा निगम कमिश्नर से मिलकर बिल्डिंग ब्रांच की इस लापरवाही की रिपोर्ट तलब करूंगा। नगर निगम के राजस्व को चूना लगाने वाले अधिकारियों की मनमानी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -” प्रिंस जौहर, डिप्टी मेयर बता दें कि जिस कालोनी में डिप्टी मेयर बुधवार को लाइव होकर बिल्डिंग ब्रांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं, दरअसल वो अवैध कालोनी 2 साल पहले की काटी जा चुकी है। लेकिन अभी तक निगम की बिल्डिंग ब्रांच ने इसके लेकर कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं करवाई है।
हालांकि विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस अवैध कालोनी काटने वाले मालिकों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करने के लिए सिफारिश निगम की थी, लेकिन राजनीतिक शह होने के चलते कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं, इस कालोनी की रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई जा चुकी है। परंतु अब मौके पर हो रहे निर्माण से ये साबित होता है कि कहीं न कहीं मिलीभगत से बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है, जिसकी भी जांच के लिए डिप्टी मेयर ने सिफारिश की है। डिप्टी मेयर ने कहा कि इतनी बड़ी कॉलोनी बिना अधिकारियों की मिलीभगत के नहीं कट सकती।
आम जनता जब अपनी गली में एक छोटा लेंटर भी डालती है, तो बिल्डिंग ब्रांच की टीम तुरंत पहुंच जाती है। 5 एकड़ में बन रही अवैध कॉलोनी का पता न होना विभागीय लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है। शहर में 200 से अधिक अवैध इमारतों की सूची बिल्डिंग ब्रांच को सौंपी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे निगम को सीधे तौर पर करोड़ों रुपये के रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है।
क्षेत्र में निर्माण रोकने की सीधी जिम्मेदारी संबंधित बिल्डिंग इंस्पेक्टर और एटीपी की होती है, जिसकी रिपोर्टिंग एमटीपी के पास जाती है। इसके बावजूद अधिकारी जानकारी न होने की बात कह रहे हैं। मौके का जायजा लेते।
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