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वेलिम (Velim) गोवा के दक्षिण गोवा जिले में स्थित एक बड़ा गांव है. यह सालसेटे क्षेत्र में आता है और इसके आसपास क्यूपेम तालुका का क्षेत्र भी पड़ता है. वेलिम की सीमा असोलना, अंबेलिम, बेटुल और क्यूनकोलिम जैसे गांवों और कस्बों से जुड़ी हुई है. गांव से होकर साल नदी बहती है, जिसके माध्यम से इसका संपर्क अरब सागर से होता है.
वेलिम का पुराना नाम वेल्लियापुरा बताया जाता है. उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 1310 ईस्वी तक वेल्लियापुरा इसका आधिकारिक नाम था. वेलिम नाम की उत्पत्ति को दो शब्दों से जोड़ा जाता है. इनमें वेल का अर्थ किनारा और हल्ली का अर्थ गांव बताया गया है. इस तरह वेलिम नाम का संबंध समुद्र या तट के किनारे बसे गांव से माना जाता है.
वेलिम का इतिहास काफी पुराना माना जाता है. इतिहासकार जॉर्ज एम. मोरेस ने अपनी पुस्तक कदंब कुल, ए हिस्ट्री ऑफ एंशिएंट एंड मीडीवल कर्नाटक में वर्तमान वेलिम से जुड़े वेल्लियापुरा परिवार का उल्लेख किया है. ऐतिहासिक विवरणों में कदंब शासक जयकेशी प्रथम का भी उल्लेख मिलता है. वर्ष 1054 ईस्वी के एक शिलालेख में जयकेशी का नाम दर्ज है. इस शिलालेख में पनजीनाखानी नाम का उल्लेख मिलता है, जिसे वर्तमान पणजी से जोड़ा जाता है.
बारहवीं शताब्दी के ताम्र अभिलेखों में पड़ोसी राज्यों के राजकुमारों और शासकों के चंद्रपुरा आने का उल्लेख मिलता है. चंद्रपुरा को वर्तमान चांदोर से जोड़ा जाता है. उस समय जयकेशी को कोंकण का शासक बताया गया है.
वेलिम से मिले कुछ कन्नड़ अभिलेखों में वेल्लियापुरा और कदंब काल से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख मिलता है. इन अभिलेखों में जयकेशी और उनके प्रतिद्वंद्वियों के बीच संघर्ष की जानकारी भी दी गई है. ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वेल्लियापुरा कदंब शासन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों में शामिल था.
वेलिम का इतिहास बाद के दौर की घटनाओं से भी जुड़ा है. 1266 या 1345 से संबंधित एक नरसंहार के बाद रानी विनोमई देवी के वेल्लियापुरा में शरण लेने का उल्लेख मिलता है. उपलब्ध अभिलेखों में सूर्यदेव और रानी विनोमई देवी से जुड़े विवरण भी दर्ज हैं. इन ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर वेलिम को गोवा के प्राचीन इतिहास और कदंब काल से जुड़े स्थान के रूप में देखा जाता है.
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