Gaya News: शिक्षक दिवस विशेष: शिक्षक इमरोज़ के इनोवेटिव आइडियाज से बच्चों में बढ़ी पढ़ाई की रुचि – Hindustan

Gaya News: आमस की अकौना पंचायत के कोरमथू महादलित टोला में संचालित प्राथमिक विद्यालय बेहतर पढ़ाई के साथ अनुशासन, स्वच्छता और रचनात्मक गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। शिक्षक इमरोज अली के इनोवेटिव आइडियाज (नवाचार) से स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। वे पढ़ाई के साथ संगीत और विभिन्न गतिविधियों के प्रयोग से बच्चों में पढ़ने की ललक पैदा कर दी है। बच्चों के यूनिफॉर्म, साफ-सफाई और अनुशासन पर विशेष ध्यान रखते हैं। साफ-सुथरी पोशाक में टाई और बेल्ट लगाकर बच्चों में स्कूल आने की आदत डालने में अहम भूमिका निभाई है। टाई और बेल्ट स्कूल से निःशुल्क मिलते हैं। संगीत की धुन पर दौड़कर पढ़ते हैं बच्चे

बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए शिक्षक इमरोज अली नायाब तरीके अपनाते हैं। झाल-मंजीरे, बांसुरी व ढोलक बजाते हुए स्कूल नहीं आने वाले बच्चे के घर पहुंच जाते हैं। इससे अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने को प्रेरित होते हैं। इस म्यूजिकल फॉर्मूले का सकारात्मक असर हुआ है। उनके इस प्रयास से स्कूल में अब 99 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति रहती है।

नो एक्सक्यूज, सीधा चलो स्कूल स्लोगन के साथ इमरोज अली ने विद्यालय में धावा दल बनाया है, जो स्कूल नहीं आने वाले बच्चों की सूची तैयार कर उन्हें सौंपते हैं। फिर धावा दल शिक्षक के साथ अनुपस्थित बच्चों के घर पहुंच स्कूल चलने को मनाते हैं। नहाने के बहाने बनाने पर शिक्षक खुद उसे नहलाते हैं और साथ स्कूल लेकर आते हैं।

बच्चों में स्वच्छता की आदत डालने के लिए इमरोज ने साबुन बैंक बनवाया है। बच्चे महीने में एक बार साबुन जमा करते हैं और जरूरत के अनुसार बैंक से लेते हैं। इसका संचालन छात्रों द्वारा किया जाता हैं। इससे बच्चों में खाने से पहले व शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की प्रवृति पैदा हो गई है ।

शिक्षक इमरोज अली बच्चों की पढ़ाई व खेल गतिविधियों पर विशेष ध्यान रखते हैं। खेल में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते रहते हैं। स्मार्ट टीवी और अन्य गतिविधियां भी बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हैं। स्कूल की गतिविधियों से प्रभावित होकर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब आधा दर्जन बच्चों ने इस सरकारी स्कूल में नामांकन कराया है। गांव के अभिभावक सुनील कुमार मांझी कहते हैं कि गुरुजी के प्रयासों ने बच्चों में पढ़ाई के साथ अनुशासन, रहन-सहन, पहनावे के तौर-तरीके और संस्कार भर रहे हैं।

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