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दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे ने पूरी राजधानी को दहला कर रख दिया है. पेइंग गेस्ट (PG) के तौर पर इस्तेमाल हो रही ये बहुमंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई. इस भयानक हादसे का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है.
सीसीटीवी में साफ दिख रहा है कि इमारत के ठीक नीचे एक बुजुर्ग अपनी छोटा-सा स्टॉल लगाकर आराम से बैठे हुए थे. तभी अचानक ऊपर से मलबा और धूल गिरने लगती है. खतरा भांपते ही बुजुर्ग शख्स अपनी जान बचाने के लिए तेजी से दूर भागते हैं.
इसके महज कुछ ही सेकेंड बाद पूरी की पूरी बिल्डिंग भरभराकर जमींदोज हो जाती है और चारों तरफ धूल का गुबार फैल जाता है.
हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत
मोती बाग स्थित सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, अब तक 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. जबकि मलबे में अब भी कई लोग को फंसे हुए हैं, जिनमें कई छात्र शामिल हैं. मौके पर NDRF, CATS एम्बुलेंस और कई प्रशासनिक टीमें मौजूद हैं और बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि उन्हें 6 सितंबर को दोपहर लगभग 1:30 बजे PCR कॉल मिली थी जिसमें उन्हें बिल्डिंग गिरने की जानकारी दी गई थी. उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुछ छात्रों को बाहर निकाला और पास के अस्पताल भिजवाया. हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पता चला कि मलबे के नीचे और भी छात्र दबे हुए हैं.
ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था रेनोवेशन, मालिक पर FIR दर्ज
पुलिस और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर रेनोवेशन का काम चल रहा था. आरोप है कि बिना सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे पिलर और दीवारों से छेड़छाड़ की जा रही थी, जिससे पूरी इमारत का ढांचा बेहद कमजोर हो गया और वो अचानक ढह गई.
इस मामले में दिल्ली पुलिस के साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिओम और दूसरे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. ये मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.
आरोपियों के खिलाफ धारा 105 BNS (गैर-इरादतन हत्या), धारा 290 BNS (इमारतों के निर्माण, मरम्मत या रख-रखाव में लापरवाही बरतना) और धारा 125(a) BNS: (उतावलेपन या लापरवाही से किसी की जान और सुरक्षा को खतरे में डालना और चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार चल रहे मकान मालिक हरिओम और दूसरे आरोपियों को पकड़ने के लिए कई टीमें बनाई गई हैं और छापेमारी जारी है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल और मंत्रियों ने संभाला मोर्चा
हादसे की खबर मिलते ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मंत्री कपिल मिश्रा सहित स्थानीय विधायक और सरकार के सीनियर अधिकारी खुद घटनास्थल पर पहुंचे. मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई ढिलाई न बरती जाए.
घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सीधे एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं. वहां उन्होंने सत्य निकेतन हादसे में घायल हुए और रेस्क्यू किए गए छात्रों से मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों से बात कर पीड़ितों के स्वास्थ्य का हाल जाना और उनके बेहतर और मुफ्त इलाज के निर्देश दिए.
MCD ने जारी किया डिमोलिशन का सख्त नोटिस
सत्य निकेतन में हुए इस बड़े हादसे के बाद नगर निगम (MCD) भी एक्शन मोड में आ गया है. इस घटना ने आसपास की पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. भविष्य में किसी और हादसे को रोकने के लिए एमसीडी ने ढही हुई इमारत के ठीक बगल वाली बिल्डिंग को खाली कराने का नोटिस जारी कर दिया है.
एमसीडी की ओर से जारी प्रीकॉशनरी नोटिस में कहा गया है कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम (DMC Act) 1957 की धारा 348 के तहत मकान नंबर 13 का परिसर भी खतरनाक और जर्जर स्थिति में पाया गया है. ये इमारत वहां रहने वाले लोगों, आसपास के निवासियों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.
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एमसीडी ने इमारत के मालिक और निवासियों को आदेश दिया है कि वो नोटिस मिलने के 3 दिनों के भीतर खुद इस खतरनाक ढांचे को ध्वस्त कर दें. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय सीमा के भीतर इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो नगर निगम खुद उस इमारत को गिरा देगा और इसका पूरा खर्च कर के बकाया के रूप में मकान मालिक से वसूला जाएगा.
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