Underground Farms: बंद हो चुकी कोयला खदानों की सुरंगों में “जमीन के नीचे खेती” (Underground Agriculture) की जा सकती है. चीनी वैज्ञानिकों ने देश के बड़े माइनिंग उद्योगों को ये प्रस्ताव दिया है. वैज्ञानिक चाहते हैं कि ग्रीन, सर्कुलर इकॉनमी बनाई जा सके.
मध्य चीन के कोयला उत्पादन वाले प्रमुख प्रांत, शानक्सी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने पिछले महीने के आखिर में ‘चाइना माइनिंग मैगजीन’ जर्नल में इस विचार के बारे में बताया है. जमीन की सतह के मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित होने के कारण, जमीन के नीचे खेती की ये जगहें खास फायदे देती हैं.
अनुमान है कि 2030 तक चीन में लगभग 15,000 बंद खदानें पूरी तरह से बंद हो जाएंगी.
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि इन खदानों में मौजूद सुरंगों, पावर ग्रिड, वेंटिलेशन सिस्टम और भूजल का इस्तेमाल खेती की सुविधाओं के लिए किया जा सकता है.
शोधकर्ताओं ने लिखा, दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के तेज़ी से बढ़ने के साथ, पारंपरिक ज़मीनी खेती प्रणालियों की स्थिरता और टिकाऊपन के सामने गंभीर चुनौतियां आ रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि “बंद-वातावरण वाली खेती” (closed-environment farming) विकसित करने का बहुत व्यावहारिक महत्व है.
पेपर के अनुसार, हालांकि पुरानी खदानों में प्राकृतिक सूरज की रोशनी नहीं पहुँचती, लेकिन उनकी काफ़ी जगह और मजबूत बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से वहां कृत्रिम रोशनी (artificial lighting) लगाई और एडजस्ट की जा सकती है. ज़मीन के नीचे का तापमान भी मौसम के बदलावों से ज़्यादा प्रभावित नहीं होता. 2018 में ही, वर्ल्ड सोसाइटी ऑफ़ सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज़ के अध्यक्ष सफ़ा रिफ़्फ़त ने बढ़ती वैश्विक खाद्य मांग को पूरा करने के लिए एक किफायती तरीके के तौर पर पुरानी कोयला खदानों में भूमिगत खेती का समर्थन किया था. इस विचार को कुछ ब्रिटिश खदान मालिकों का समर्थन मिला, जबकि चीनी सरकार ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है. ब्रिटेन में नॉर्थ यॉर्कशायर के रिसर्चर ने ज़मीन की सतह से 1,000 मीटर से ज़्यादा नीचे दुनिया का सबसे गहरा भूमिगत फ़ार्म बनाया है.
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Vineet Sharan Srivastava एक भारतीय पत्रकार और डिजिटल न्यूज एक्सपर्ट हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 17 वर्षों का अनुभव है. वह असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं … और पढ़ें
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