रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड में कृषि को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में नेपाल हाउस स्थित कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के कार्यालय कक्ष में इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फोर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (आईसीआरआईएसएटी) के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की कृषि व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने और कृषि संबंधी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आईसीआरआईएसएटी की विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस तकनीक के माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में किस प्रकार की फसलें उगाई जा रही हैं, किस भूमि पर कौन-सी फसल के लिए उपयुक्त परिस्थितियां हैं, अपलैंड क्षेत्रों में किस तरह की खेती हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों में क्रॉपिंग इंटेंसिटी कितनी है। इससे कृषि विभाग को वर्तमान फील्ड ऑब्जर्वेशन और सीमित फील्ड डेटा पर निर्भरता कम करते हुए अधिक सटीक और वैज्ञानिक डेटा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। बैठक में कृषि विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी, विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी और कृषि निदेशक विद्यानंद पंकज सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड जैसे विविध भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों वाले राज्य में एक क्षेत्र-एक ही कृषि रणनीति प्रभावी नहीं हो सकती। अलग-अलग भूमि, मिट्टी, वर्षा और जल उपलब्धता के अनुसार फसल का चयन और कृषि योजनाओं का निर्धारण आवश्यक है। इसके लिए सटीक और विश्वसनीय डेटा बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आईसीआरआईएसएटी की तकनीक के माध्यम से प्राप्त डेटा के आधार पर यह तय करने में सहायता मिलेगी कि किस क्षेत्र की भूमि में कौन-सी फसल बेहतर होगी, किसानों को किस प्रकार के बीज उपलब्ध कराए जाएं और कृषि संबंधी योजनाओं का हस्तक्षेप किन क्षेत्रों में और किस रूप में किया जाए।
झारखंड के कई क्षेत्रों में मिट्टी की अत्यधिक अम्लीयता, वर्षा, रासायनिक उपयोग और अन्य कारणों से मिट्टी की उर्वरता में आ रही कमी को भी महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया। इसमें सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, जीआईएस और मशीन लर्निंग के माध्यम से राज्य की मिट्टी और फसल पैटर्न का वैज्ञानिक डेटा तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके आधार पर मिट्टी के पीएच और अम्लीयता में सुधार के लिए चूना उपचार, जैविक प्रबंधन व स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जा सकती है।
मंत्री ने कहा कि इस तकनीक का उपयोग केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। सटीक भूमि व फसल डेटा सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित विभागों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। इसके माध्यम से यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी क्षेत्र की भूमि और फसल के लिए किस प्रकार की सिंचाई व्यवस्था अधिक प्रभावी और लाभकारी होगी।
हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में ‘हिन्दुस्तान’ विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्यों सहित देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्करण प्रकाशित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपरि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद विस्तार से न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play