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अमेरिका में वीजा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. इसी कड़ी में अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनी Cognizant की PERM (स्थायी रोजगार प्रमाणन आवेदन) फाइलिंग पर रोक लगा दी है.
दरअसल, PERM वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से अमेरिका में काम करने के लिए स्पॉन्सर करती हैं. यह स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की प्रक्रिया का पहला अहम कदम है.
अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी एस्पोसिटो ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि Cognizant और Cloudera की स्थायी रोजगार से जुड़ी फाइलिंग को जांच के बाद रोक दिया गया है. यह जांच व्हाइट हाउस की फ्रॉड टॉक्स फोर्स और दूसरे अधिकारियों के साथ मिलकर की गई.
डी एस्पोसिटो ने सोशल मीडिया पर कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. वीजा से जुड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.
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क्या है PERM प्रोसेस?
PERM का पूरा नाम प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट है. इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी के लिए स्पॉन्सर करने की मंजूरी मांगती हैं. इस प्रोसेस में कंपनी को यह साबित करना होता है कि उस नौकरी के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है.
कंपनी को यह भी दिखाना होता है कि विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी या काम करने की स्थिति पर बुरा असर नहीं पड़ेगा. PERM की मंजूरी मिलने के बाद ही विदेशी कर्मचारी के स्थायी निवास की आगे की प्रक्रिया बढ़ती है.
ट्रंप प्रशासन ने जुलाई में H-1B और PERM वीजा कार्यक्रमों में कथित फर्जीवाड़े को लेकर बड़ी जांच शुरू की थी. अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन कार्यक्रमों का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने की कोशिश की जा सकती है.
Fighting fraud is a TEAM SPORT.@Sonderling47 and I are for real.@Cognizant’s PERM filings are suspended. @DOLOIG is on the hunt.
Threats to American workers will NOT be tolerated.
Alongside @WHFraudTF, we’re following facts, fraud and finances.
Handcuffs await.
इसी जांच के बीच Cognizant की PERM फाइलिंग पर रोक लगाई गई है. अमेरिकी श्रम विभाग के अधिकारी ने संकेत दिया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और पैसों के लेनदेन पर भी नजर रखी जा रही है.
गौरतलब है, Cognizant की शुरुआत 1994 में चेन्नई में हुई थी. अब इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यू जर्सी में है. कंपनी बड़ी संख्या में भारतीय और दूसरे देशों के कर्मचारियों के साथ काम करती है.
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून तक Cognizant को 3,510 H-1B वीजा याचिकाओं की मंजूरी मिली थी. साल 2020 में यह संख्या 9,413 थी. H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को विशेषज्ञता वाले काम के लिए अमेरिका बुलाती हैं.
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PERM फाइलिंग पर रोक से कंपनी की उन नौकरियों पर असर पड़ सकता है, जिनमें विदेशी कर्मचारियों को लंबे समय के लिए अमेरिका में रखने की प्रक्रिया चल रही है. हालांकि, मौजूदा कार्रवाई का अंतिम असर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा. फिलहाल अमेरिकी सरकार ने वीजा नियमों के उल्लंघन और कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त रुख अपना रखा है.
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