जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह मंगलवार को एक्सएलआरआई के प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया। इसमें झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में राज्यपाल ने छात्राओं को डिग्री और मेडल प्रदान किए। समारोह में राज्यपाल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को ज्ञान, कौशल, शोध, नवाचार और रचनात्मकता के साथ जोड़ा जा रहा है, ताकि हमारा देश विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार कर सके। इस लक्ष्य को हासिल करने में देश की बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां ही विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करेंगी。
दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह नई जिम्मेदारियां संभालने की एक नई यात्रा का आरंभ है। डिग्री सिर्फ अवसर दे सकती है, लेकिन चरित्र, संस्कार और व्यवहार ही वास्तविक पहचान दिलाते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह हमें सोचने की शक्ति, सही-गलत में अंतर करने का विवेक और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे असफलता से घबराएं नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ें और अपनी सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर अपने परिवार, समाज, झारखंड और देश के गौरव को बढ़ाने का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता तभी मानी जाएगी, जब एक बेटी की सफलता से दूसरी बेटी को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा सिर्फ रोजगार का साधन नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी को समझने का भी बोध देती है। महिला विश्वविद्यालय आने वाले समय में शोध और नवाचार के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा। विश्वविद्यालय की पहचान सिर्फ बड़े बिल्डिंग से नहीं, वहां के छात्र-छात्राओं से होती है। उन्होंने छात्राओं को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने को कहा।
महिला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो. ईला कुमार ने कहा कि महिला विवि झारखंड का पहला विश्वविद्यालय है, जिसमें चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को समय से पहली बार पूरा किया गया है। यहां समय से परीक्षा आयोजित की गई। विवि को नवाचार अनुसंधान विश्वविद्यालय का दर्जा मिला है। अंतरिक्ष संबंधी स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए इसरो सर्टिफाई कंपनी स्पेस किड्ज इंडिया से महिला विश्वविद्यालय ने एमओयू किया है। कुलपति ने कहा कि सिदगोड़ा कैंपस में नई बिल्डिंग बनेगी। यहां शिक्षकों के लिए आवासीय परिसर बनेगा। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर के लिए आवास बनेंगे। साथ ही प्रशासनिक बिल्डिंग एवं महिला छात्रावास भी बनाया जाएगा।
दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि डिग्री आपको एक बड़ी जिम्मेदारी देती है। इसलिए यह सफर की शुरुआत है, न कि मंजिल है। उन्होंने कहा कि आज तकनीक देश समेत पूरे विश्व को नई दिशा दे रही है। नई शिक्षा नीति इसी अनुरूप तैयार की गई है। इससे भारत ग्लोबल नॉलेज सेंटर के रूप में विकसित होगा। उन्होंने छात्राओं को रिसर्च के क्षेत्र में आगे जाने की अपील की। 2047 तक देश को ग्लोबल लीडर बनाने के लिए उन्होंने छात्राओं को योगदान देने की अपील की।
समारोह में मुस्कान महतो को कुलाधिपति पदक दिया गया। ख़ुशी महतो को तीन पदक को प्रदान किया गया। वहीं, स्नातक की टॉपर श्वेता तिवारी को ओवरऑल स्नातक टॉपर का गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। रेखा झा एक्सीलेंस इन इकोनॉमिक्स अवार्ड रीमा मार्डी को दिया गया। इसके साथ एक लाख रुपये भी रीमा मार्डी को प्रदान किया गया। दीक्षांत समारोह में कुल 1990 छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें से विभिन्न संकायों की 55 छात्राओं को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा चार शोधार्थियों को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।
शॉर्ट बायो : भादो माझी पिछले 17 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ में प्रिंसिपल कोरेस्पोंडेंट के तौर पर जनजातीय बहुल इलाक़ों में पत्रकारिता कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
भादो माझी प्रिंट मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में प्रिंसिपल कोरेस्पोंडेंट के तौर पर राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर नजर रखते हैं। जनजातीय समाज के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, पारंपरिक एवं शैक्षिक पहलुओं के विश्लेषण पर उनका विशिष्ट अनुभव हैं। 2021 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने प्रिंट मीडिया एवं डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
करियर का सफर :
भादो माझी ने अपने करियर की शुरुआत 2009 में दैनिक जागरण अखबार से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2015 में दैनिक जागरण में उन्हें लोकल कंटेंट क्रिएटर टीम का नेतृत्व दिया गया। 2015 से 2021 तक दैनिक जागरण में लोकल रिपोर्टिंग टीम का नेतृत्व करने के बाद वह ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग
मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएट होने के कारण भादो माझी को पत्रकारिता की तकनीकी और फील्ड प्रैक्टिकलिटी की मजबूत समझ है। इसी वजह से उनका राजनीतिक बीट पर कमांड होने के साथ उन्हें जनजातीय समाज में आ रहे परिवर्तन की शोध स्तरीय विशेषज्ञता प्राप्त है। झारखंड के ट्राइबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज के शोध छात्रों के लिए उन्होंने फ़ील्ड गाइड के रूप में भी अपनी एक्स्पर्टीज़ को साझा किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उनकी शोध आधारित स्टोरीज को आज भी रेफरेंस के तौर पर जनजातीय मामलों की रिपोर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
ट्राइबल स्टडीज एवं योगदान
झारखंड के 32 (अब 33) जनजाति की रूढ़ि परंपरा से लेकर स्वशासन व्यवस्था के बारे में उनकी पकड़ न सिर्फ़ इन जनजातियों के बीच मज़बूत है बल्कि अलग अलग माध्यमों से इन समुदायों की स्थिति और संभावनाओं पर भी इनकी रिपोर्ट सरकार के नीति निर्धारकों तक के लिए इन जनजातियों का मंतव्य प्रस्तुत करती रही है। भादो माझी का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है—उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना तो है ही, साथ ही वंचित वर्ग की आवाज बनकर नीति निर्धारकों तक वस्तुस्थिति पहुंचाना और भविष्य की रणनीति को बेहतर बनाने में अपना योगदान देना है।
विशेषज्ञता
झारखंड के 32 जनजाति समाज की समझ
रूढ़ि परंपरा पर गहरी पकड़
सुदूर गांवों के अंतिम पंक्ति में खड़े आदिवासियों से सीधा संवाद
झारखंड की सभी जनजाति की भाषा की जानकारी
देश की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति संथाल समाज से आना
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