विद्या भवन रूरल इंस्टिट्यूट एवं राजस्थान साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी सप्ताह में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीकृष्ण जुगनू ने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कभी संकोच की भाषा रही हिंदी आज सम्मान और आत्मविश्वास का सशक्त माध्यम है। इ
ज्ञान व शोध की भाषा बने हिंदी : शिव और नंदी से उद्भूत नंदिनागरी लिपि का संदर्भ देते हुए जुगनू ने हिंदी को केवल बोलचाल तक सीमित न रखकर ज्ञान, शिक्षा और शोध का माध्यम बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर 9 सितंबर को भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। राजस्थान साहित्य अकादमी और युगधारा के साझे में उदयपुर के अकादमी सभागार में वैश्विक हिंदी विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदी को हमारी सभ्यता व गौरव की पोषक और सशक्त अभिव्यक्ति की बड़ी ताकत बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अणुव्रत के संचय जैन ने हिंदी का विस्तार चिकित्सा, विज्ञान और विधि क्षेत्रों में करने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मलय पानेरी ने कहा कि हिंदी को गंगा नदी की तरह अन्य भाषाओं के शब्द आत्मसात कर समृद्ध होना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. विद्या पालीवाल एवं बंशीलाल लढ्ढा को उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘हिंदी सेवा सम्मान’ से नवाजा गया। विशिष्ट अतिथि डॉ. चंद्रकांता बंसल ने हिंदी दिवस को वर्ष भर के समर्पण का अवसर बताया।
वहीं डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने देवनागरी के प्रसार पर बल दिया। गोष्ठी में डॉ. चंद्र प्रकाश चित्तौड़ा की लघु पुस्तिका का विमोचन भी हुआ। स्वागत भाषण प्रकाश तातेड़ ने दिया, संचालन श्याम मठपाल ने किया और धन्यवाद ज्ञापन अकादमी सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने किया। अकादमी सचिव डॉ. वसंत सिंह सोलंकी ने कहा कि अपनी भाषा-संस्कृति छोड़ने वाला राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। निदेशिका प्रो. कनिका शर्मा ने दैनिक जीवन में हिंदी अपनाने पर बल दिया। स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ. सरस्वती जोशी ने और संचालन डॉ. निर्मला शर्मा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. मनीष रावल, डॉ. कंचन पानेरी, डॉ. अंजु जैन, डॉ. सबा खान, डॉ. ज्योति कंठालिया, डॉ. नीलू तिवारी, डॉ. हर्षित भटनागर , डॉ. किरण असनानी, डॉ. लक्ष्मण सिंह, मीनाक्षी पारीक एवं राजेश जैन उपस्थित रहें। हिंदी सप्ताह में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीकृष्ण जुगनू कार्यक्रम को संबोधित करते हुए।
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