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आपने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ किसी भी कार्यक्रम की तस्वीर देखी होगी, जिसमें एक सैन्य अधिकारी उनके ठीक पीछे या बेहद करीब खड़ा नजर आता है. यही हैं उनके Aide-de-Camp यानी ADC. ऊपर से देखने पर लगता है कि ये सिर्फ प्रोटोकॉल निभाने वाला पद है, लेकिन हकीकत में इस अफसर के कंधों पर जिम्मेदारी उससे कहीं ज्यादा भारी होती है.
पूर्व ADC मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने राज शमानी के पॉडकास्ट ‘Figuring Out’ पर इस भूमिका से जुड़े कई चौंकाने वाले पहलू सामने रखे. उन्होंने बताया ADC बनने के लिए कैसी ट्रेनिंग दी जाती है, और राष्ट्रपति के इर्द-गिर्द रहते हुए उनकी आंखें असल में किन चीजों पर टिकी रहती हैं.
थकान चाहे कितनी भी हो, नजर नहीं झुकनी चाहिए
सांब्याल बताते हैं कि सेना की ट्रेनिंग में अफसरों की ऑब्जर्वेशन क्षमता को सबसे कठिन हालात में परखा जाता है .70-80 किलो तक वजन उठाते हुए, भूखे-प्यासे रहकर, नींद पूरी न होने की हालत में भी उन्हें आसपास पर पैनी नजर रखनी सिखाई जाती है.
इसके लिए खास ‘ऑब्जर्वेशन एक्सरसाइज’ होती हैं. रास्ते में जानबूझकर चीजें छुपा दी जाती हैं, जैसे पेड़ के पीछे रखा एक हेलमेट, और बाद में पूछा जाता है कि रास्ते में क्या-क्या नजर आया. ‘ऑब्जर्वेशन एक्सरसाइज’ का मतलब है-शरीर चाहे कितना भी थक जाए, दिमाग और आंखें हमेशा अलर्ट मोड में रहनी चाहिए.
सांब्याल ने असल हमले की स्थिति में अपनाई जाने वाली रणनीति को सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनकी बातों से इतना जरूर साफ हुआ कि ADC को हर पल किसी भी अनहोनी के लिए तैयार रहना पड़ता है. राष्ट्रपति की सुरक्षा एक बहुस्तरीय व्यवस्था है, जिसमें ADC अकेला जिम्मेदार नहीं होता,लेकिन सबसे करीब खड़े होने के चलते किसी भी असामान्य हरकत को सबसे पहले भांपने का जिम्मा उन्हीं पर आता है.
हाथ मिलाना भी बन सकता है खतरा
राष्ट्रपति से मिलने आने वाले हर शख्स की नीयत पहले से पता नहीं होती. यही वजह है कि सुरक्षा टीम किसी को भी उसके सामान्य व्यवहार के आधार पर पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान सकती. मुलाकातियों को पहले से ब्रीफ किया जाता है और मुलाकात के दौरान सुरक्षाकर्मी हमेशा मौजूद रहते हैं, ताकि कोई भावनाओं में बहककर अप्रत्याशित हरकत न कर बैठे.
पानी के गिलास तक पर पैनी नजर
सांब्याल के मुताबिक राष्ट्रपति की सुरक्षा में छोटी से छोटी चीज भी नजरअंदाज नहीं होती.यहां तक कि उनके पानी के गिलास पर भी नजर रखी जाती है कि उसे किसने भरा और वो सुरक्षित है या नहीं. खाने की तैयारी की भी पूरी निगरानी होती है, और अगर राष्ट्रपति कहीं और भोजन करने वाली हों तो उनका शेफ पहले वहां पहुंचकर तैयारियां खुद चेक करता है.
ADC यानी सिर्फ पीछे चलने वाला अफसर नहीं
अपनी जिम्मेदारी को सांब्याल ने एक ही शब्द में समेटा -सबकुछ यानी राष्ट्रपति की हर जरूरत, संवाद, समन्वय और प्रोटोकॉल से जुड़ा काम उनके जिम्मे होता है. मसलन, अगर राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री से बात करनी हो, तो इसकी पूरी व्यवस्था ADC ही करता है.
सांब्याल करीब तीन साल तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC रहे और 12 साल की सैन्य सेवा के बाद प्रीमैच्योर रिटायरमेंट ली. उनकी ये बातें बताती हैं कि राष्ट्रपति के साथ नजर आने वाला ये अफसर सिर्फ खड़ा नहीं रहता-वो हर पल देखता है, समझता है, अंदाजा लगाता है, और किसी भी हालात के लिए तैयार रहता है.
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