भास्कर न्यूज | बक्सर
दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनी पहचान बना चुकी हिन्दी भाषा का हिन्दी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद वर्ष 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। हिन्दी आज भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में बोली और समझी जाती है। यह भारतीय संस्कृति और समाज को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषाओं में शामिल है।
विदेशों में भी बढ़ रही हिन्दी की पहुंच : नेपाल, मॉरीशस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, न्यूजीलैंड और सिंगापुर सहित कई देशों में हिन्दी बोलने और समझने वाले लोग रहते हैं। हिंदी फिल्मों, गीतों, टेलीविजन कार्यक्रमों और डिजिटल माध्यमों ने भी भाषा को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा और साहित्य की पढ़ाई हो रही है। शोध भी हो रहा है।
अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव पर उठे सवाल हिन्दी दिवस के अवसर पर बक्सर के वरिष्ठ अधिवक्ता, साहित्यकार एवं प्रबुद्ध बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने हिंदी की अंतरराष्ट्रीय पहचान के बावजूद देश में इसके घटते व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी का बाजार और प्रभाव लगातार बढ़ा है। मीडिया, सिनेमा, दूरदर्शन, दूरसंचार और डिजिटल माध्यमों में हिंदी की स्वीकार्यता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। शिक्षा और औपचारिक कामकाज के कई क्षेत्रों में अंग्रेजी का प्रभाव अब भी अधिक है।
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