रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर वर्ष 2025 के दौरान सैनिकों की संख्या में उल्लेखनीय कटौती की है। हालांकि भारत की तैनाती अभी भी मजबूत है तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भारतीय सेना तैयार है। रक्षा मंत्रालय की जारी हुई वार्षिक रिपोर्ट में एलएसी को लेकर यह दावा किया गया। हालांकि चीन की तरफ से इस बाबत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।
वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एलएसी पर पीएलए सैनिकों की तैनाती में उल्लेखनीय कमी देखी गई। एलएसी पर पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में पीएलए की अब सिर्फ 10 सशस्त्र ब्रिगेड तैनात हैं। एक ब्रिगेड में 4500-5000 सैनिक होते हैं। यानी एलएसी पर चीन के 45000-50000 सैनिकों के तैनात होने का अनुमान है। जबकि गलवान घाटी संघर्ष के बाद इतने सैनिक चीन की तरफ से सिर्फ पूर्वी लद्दाख इलाके में ही एलएसी पर तैनात बताए गए थे।
भारत की तरफ से एलएसी पर कितने सैनिक हैं, इसका जिक्र नहीं किया गया लेकिन यह कहा गया कि भारत की तैनाती मजबूत है तथा वह किसी भी स्थिति का मुकाबला करने में सक्षम है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के बीच राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य स्तर पर द्विपक्षीय वार्ताओं ने उत्तरी सीमा पर सकारात्मक विकास को बढ़ावा दिया, जिससे एलएसी पर स्थिरता आई। मार्च और जुलाई 2025 में क्रमशः परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 33वीं और 34वीं बैठकों के साथ संपर्कों को फिर से शुरू किया गया। वर्ष के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता फिर से शुरू हुई। दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो दौर की वार्ताएं हुईं। इतना ही नहीं अक्टूबर में कोर कमांडरों की 23वीं बैठक हुई।
इसके अलावा पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा से भी संबंधों को मजबूती मिली। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में जारी हुई है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत में मौजूद थे।
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर की स्थिति को नियंत्रण में बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में एलओसी पर घुसपैठ के छह प्रयास विफल किए गए जिनमें 12 आतंकों को ढेर किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि पहले के वर्षों की तुलना में घुसपैठ में कमी आई। हालांकि संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाएं बढ़ी हैं। 2025 में कुल 163 उल्लंघन पाए गए जिनमें से 124 ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए। हालांकि 2024 में संघर्ष विराम के उल्लंघन के महज दो मामले हुए थे। वर्ष के दौरान पत्थरबाजी की कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई।
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