वैकल्पिक हेडिंग – भारत में जोखिम भरी गर्मी का वैश्विक रिकॉर्ड बना
– भारत की सबसे बड़ी आबादी 30 दिनों तक तपी
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जलवायु परिवर्तन की मार
– देश के लगभग 12 करोड़ लोगों ने 30 दिनों तक झेली भीषण गर्मी
– क्लाइमेट सेंट्रल की जारी रिपोर्ट में खुलासा
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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में जून से अगस्त 2026 के दौरान दुनिया में सबसे अधिक लोग (लगभग 11.7 करोड़) जलवायु परिवर्तन के कारण कम से कम 30 दिनों की जोखिम भरी गर्मी के संपर्क में आए।
यह जानकारी वैज्ञानिकों के समूह ‘क्लाइमेट सेंट्रल’ द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। ‘रिस्की हीट एडेड बाय क्लाइमेट चेंज: जून टू अगस्त 2026’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में जोखिम भरे तापमान वाले दिनों को ऐसे दिनों के रूप में परिभाषित किया गया है, जो साल 1991-2020 की अवधि की तुलना में स्थानीय क्षेत्र में दर्ज किए गए 90 प्रतिशत तापमान से अधिक गर्म थे। यह वह स्तर है, जहां से गर्मी के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने लगते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जून से अगस्त के बीच भारत 1991-2020 के औसत की तुलना में औसतन 0.7 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रहा। अध्ययन से पता चला कि भारत में इस गर्मी के दौरान औसतन एक व्यक्ति ने लगभग 39 दिन ऐसे तापमान को झेला, जिस पर जलवायु परिवर्तन का अत्यधिक प्रभाव था। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के करीब 11.7 करोड़ लोग इस अत्यधिक जोखिम भरी गर्मी से सीधे प्रभावित हुए, जो दुनिया के किसी भी देश में सबसे बड़ी संख्या है।
रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर में जोखिम भरे तापमान वाले सबसे अधिक 53 दिन दर्ज किए गए। इसके बाद चेन्नई 40 दिन, राजकोट 29 दिन, अमृतसर 29 दिन और लखनऊ सबसे अधिक 27 दिन गर्म रहा। वहीं, मुंबई में ऐसे दिनों की संख्या सबसे अधिक 86 दिन रही, जहां तापमान पर जलवायु परिवर्तन का गहरा असर देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर जून से अगस्त के बीच 1.5 अरब से अधिक लोगों ने जलवायु परिवर्तन के कारण जोखिम भरे तापमान के 30 या उससे अधिक दिनों का सामना किया। एशिया में जोखिम भरे तापमान का सामना करने वाली आबादी सबसे अधिक थी। महाद्वीप की 58 प्रतिशत आबादी यानी 2.8 अरब लोग कम से कम 30 दिनों तक जोखिम भरे तापमान के प्रभाव में रहे।
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